West Asia Crisis: क्या प्रॉपर्टी खरीदना होने वाला है और महंगा! अप्रैल में भी चलती रही US-ईरान जंग तो 5% बढ़ सकती है कंस्ट्रक्शन कॉस्ट

West Asia Crisis: स्टील, लॉजिस्टिक्स और पेट्रोकेमिकल्स से जुड़े मैटेरियल्स पर शुरुआती दबाव पहले से ही दिखाई दे रहा है। कंस्ट्रक्शन स्टील की कीमतों में पहले ही काफी तेजी आ चुकी है। कुछ बाजारों में TMT स्टील की कीमतें लगभग 20% तक बढ़ गई हैं

अपडेटेड Apr 04, 2026 पर 12:09 PM
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अगर संघर्ष लंबा खिंचा कंस्ट्रक्शन मैटेरियल और संसाधनों की कमी के कारण प्रोजेक्ट्स की समयसीमा भी प्रभावित हो सकती है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी हो रहा है। इस सेक्टर में लागत पर दबाव आने लगा है। कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की कीमतों में वृद्धि हो रही है। उद्योग जगत के दिग्गजों का मानना है कि अगर इजरायल-अमेरिका और ईरान की जंग अप्रैल महीने में भी जारी रही तो निर्माण लागत में 5 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है। अगर संघर्ष लंबा खिंचा कंस्ट्रक्शन मैटेरियल और संसाधनों की कमी के कारण प्रोजेक्ट्स की समयसीमा भी प्रभावित हो सकती है। अंत में नतीजा प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आ सकता है।

मिडिल ईस्ट में चल रही यह लड़ाई 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई थी। रियल एस्टेट सलाहकार वेस्टियन के मुताबिक, इस संकट से उपजे नकारात्मक रुझानों के बीच भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश जनवरी-मार्च 2026 के दौरान तिमाही आधार पर 62 प्रतिशत गिरकर 1.41 अरब डॉलर रह गया। अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में रियल एस्टेट में निवेश 3.73 अरब डॉलर रहा था। हालांकि सालाना आधार पर मार्च 2026 तिमाही में निवेश 74 प्रतिशत बढ़ा। वहीं कॉलियर्स इंडिया के मुताबिक, कुल संस्थागत निवेश 61 प्रतिशत घटकर 1.6 अरब डॉलर रह गया, जबकि अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में यह 4.2 अरब डॉलर था।

कॉलियर्स इंडिया का यह भी कहना है कि जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के दौरान भारतीय रियल एस्टेट में विदेश निवेश 75 प्रतिशत घटकर 40 करोड़ डॉलर रह गया। घरेलू निवेशकों ने 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया। अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में घरेलू निवेश 2.6 अरब डॉलर और विदेशी निवेश 1.6 अरब डॉलर रहा था।


अगली 1-2 तिमाहियों में बेहद बढ़ सकती है निर्माण की लागत

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अंबुजा नियोतिया ग्रुप के चेयरमैन हर्षवर्धन नियोतिया का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट रियल एस्टेट के लिए एक लागत बढ़ाने वाले साइकिल को जन्म दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें फरवरी 2026 में 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे थीं। मार्च महीने में ये बढ़कर 110-120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी भारी उछाल देखा गया है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड का स्पॉट प्राइस (यानि तुरंत डिलीवरी वाला भाव) 141.36 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। वहीं जून में डिलीवरी वाले ब्रेंट फ्यूचर्स का भाव 109.03 डॉलर प्रति बैरल है।

नियोतिया के मुताबिक, ‘‘स्टील, लॉजिस्टिक्स और पेट्रोकेमिकल्स से जुड़े मैटेरियल्स पर शुरुआती दबाव पहले से ही दिखाई दे रहा है। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही, तो अगली 1-2 तिमाहियों में निर्माण की लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर भविष्य में संपत्तियों की कीमतों पर पड़ेगा।’’

रिपोर्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट बॉडी क्रेडाई के पश्चिम बंगाल के प्रेसिडेंट और मर्लिन ग्रुप के चेयरमैन सुशील मोहता का मानना है, ‘‘अगर युद्ध अप्रैल में भी जारी रहता है, तो निर्माण की लागत तुरंत 5 प्रतिशत बढ़ जाएगी। बिल्डिंग बनाने में लगने वाले मैटेरियल्स की कमी के कारण निर्माण कार्य की समय-सीमा भी पटरी से उतर जाएगी।’’ मोहता ने लंबी अवधि के जोखिमों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष भारत की ब्रॉडर इकोनॉमी को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी होगा।

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TMT स्टील की कीमतें लगभग 20% तक बढ़ीं

कंस्ट्रक्शन स्टील की कीमतों में पहले ही काफी तेजी आ चुकी है। रियलटर्स के मुताबिक, कुछ बाजारों में TMT स्टील की कीमतें लगभग 20% तक बढ़ गई हैं। फरवरी और मार्च के बीच ये कीमतें लगभग ₹62,000 से बढ़कर ₹72,000 प्रति टन हो गईं। आम रिपोर्टों से पता चलता है कि पिछले 2-3 महीनों में कीमतों में 18-25% की बढ़ोतरी हुई है। सीमेंट की कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर रहीं, इनमें 0-5% का ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हालांकि, सीमेंट की मांग का दबाव बढ़ रहा है।

रेटिंग एजेंसी ICRA का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, बिटुमेन की कीमतों पर दबाव डालने वाला मुख्य कारक है। इन कीमतों का असर कंस्ट्रक्शन कंपनियों के ऑपरेटिंग मुनाफे पर पड़ने का अनुमान है।

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