RBI MPC Meeting: आरबीआई कल इंटरेस्ट रेट में कितनी कमी कर सकता है? जानिए एक्सपर्ट्स के जवाब

RBI MPC Meeting: आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6 अप्रैल को शुरू हुई थी। अगर एमपीसी रेपो रेट में कमी करने का फैसला करती है तो इसका फायदा होम लोन के नए और पुराने दोनों तरह के ग्राहकों को मिलेगा। अभी रेपो रेट 5.25 फीसदी है

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 3:21 PM
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रेपो रेट वह रेट है, जिस पर आरबीआई दूसरे बैंकों को कर्ज देता है।

RBI MPC Meeting: आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी 8 अप्रैल को आएगी। यह नए वित्त वर्ष की पहली मॉनेटरी पॉलिसी होगी। होम लोन के ग्राहकों की नजरें इस पॉलिसी पर लगी है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 8 अप्रैल को सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। अभी रेपो रेट 5.25 फीसदी है। सवाल है कि क्या केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में कमी का ऐलान करेगा?

फरवरी 2025 से अब तक 1.25% घटा है रेपो रेट

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6 अप्रैल को शुरू हुई थी। अगर एमपीसी रेपो रेट में कमी करने का फैसला करती है तो इसका फायदा होम लोन के नए और पुराने दोनों तरह के ग्राहकों को मिलेगा। हालांकि, इकोनॉमिस्ट्स, फॉरेन एक्सचेंज स्ट्रेटेजिस्ट्स और हेड ऑफ ट्रेजरी के बीच मनीकंट्रोल के पोल के मुताबिक, आरबीआई इंटरेस्ट रेट में 8 अप्रैल को किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। पिछले साल फरवरी से अब तक केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 1.25 फीसदी की कमी कर चुका है। आखिरी बार उसने दिसंबर 2025 में रेपो रेट में कमी की थी।


होम लोन के ग्राहकों को बड़ी राहत दे चुका है RBI

बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, "2025 की शुरुआत से आरबीआई अब तक 125 बेसिस प्वाइंट की कमी कर चुका है। इससे 20 साल के 50 लाख रुपये के 8.5 फीसदी इंटरेस्ट रेट की EMI में हर महीने करीब 3,050 रुपये की कमी आ चुकी है। पूरे लोन की अवधि के दौरान यह 7.3 लाख रुपये की सेविंग्स है।" एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी देश और विदेश में अनिश्चितता की स्थिति है। इससे केंद्रीय बैंक फिलहाल इंटरेस्ट रेट को अपरिवर्तित रख सकता है।

रेपो रेट को अपरिवर्तित रख सकता है केंद्रीय बैंक

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इकरा की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिती नायर ने कहा, "क्रूड ऑयल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता को देखते हुए आरबीआई अप्रैल की पॉलिसी में रेपो रेट को अपरिवर्तित रख सकता है। केंद्रीय बैंक इस बारे में कोई फैसला लेने से पहले इनफ्लेशन के डेटा पर करीबी रखना चाहेगा।" इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि आरबीआई सावधानी बरतना चाहेगा। केंद्रीय बैंक का फोकस ग्रोथ और इनफ्लेशन आउटलुक पर होगा।

रेपो रेट में बदलाव का असर होम लोन ग्राहकों पर पड़ता है

रेपो रेट वह रेट है, जिस पर आरबीआई दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इस वजह से उन्हें होम लोन के इंटरेस्ट रेट को बढ़ाना पड़ता है। इससे होम लोन के ग्राहकों की EMI बढ़ जाती है। जो लोग EMI नहीं बढ़ाना चाहते हैं, उनके लोन की अवधि बढ़ जाती है। इसके उलट रेपो रेट घटने पर होम लोन के ग्राहकों की EMI कम हो जाती है या लोन की अवधि घट जाती है।

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आरबीआई रेपो रेट घटाने से पहले इनफ्लेशन डेटा का इंतजार करेगा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आरबीआई इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाता है तो होम लोन के ग्राहकों को EMI में कमी के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। उधर, मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई की वजह से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में आरबीआई के लिए इंटरेस्ट रेट घटाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इस बारे में आरबीआई की 8 अप्रैल की मॉनेटरी पॉलिसी से संकेत मिल सकते हैं।

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