लंबी अवधि के कई निवेशकों का सिप में निवेश का मकसद पूरा हो गया है। उन्होंने अपना घर खरीदे लिए हैं, बच्चों का एजुकेशन पूरा हो गया है और रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार हो गया है। अब समय रिटायरमेंट का आ रहा है। इसका मतलब है कि अब उनका फोकस अपने रिटायरमंट फंड के सही इस्तेमाल पर होगा।
पूरे पैसे निकालने की नहीं करें गलती
कई इनवेस्टर निवेश का लक्ष्य पूरा होते ही पूरा पैसा निकाल लेते हैं। यह गलत है। एंजेल वन के चीफ बिनजेस अफसर (न्यू बिजनेस) सौरभ अग्रवाल ने कहा, "अगर इनवेस्टर पिछले कई सालों से सिप के जरिए निवेश कर रहा है और फाइनेंशियल गोल हासिल हो गया है या हासिल होने के करीब है तो विड्रॉल का प्लान काफी सावधानी के साथ बनाने की जरूरत है।"
इमर्जेंसी फंड के लिए पैसे अलग कर दें
पहला काम सिप को स्टॉप करना होना चाहिए, न कि पूरे पैसे निकालना। कुछ भी करने से पहले इनवेस्टर्स को 6-12 महीनों के इमर्जेंसी फंड के लिए पैसा अलग कर देना चाहिए। यह पैसा लिक्विड फंड या सेविंग्स अकाउंट में रखा जा सकता है। इससे आप निश्चिंत रह सकते हैं।
सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान का करें इस्तेमाल
एकमुश्त पूरा पैसा निकालने की जगह आपको सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) का इस्तेमाल करना चाहिए। एसडब्ल्यूपी के जरिए निवेशक रेगुलर इंटरवल पर फिक्स्ड अमाउंट निकाल सकता है। इससे मार्केट टाइमिंग से जुड़ा रिस्क घट जाता है। साथ ही कैपिटल गेंस टैक्स भी स्प्रेड हो जाता है। अगर आपको तुरंत पैसे की जरूरत नहीं है तो आप अपना पैसा हाई रिस्क वाले इक्विटी फंड से निकालकर शॉर्ट टर्म डेट फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट में डाल सकते है। विड्रॉल के प्लान में एग्जिट लोड और कैपिटल गेंस टैक्स का ध्यान रखना जरूरी है।
रिटायरमेंट के करीब रिटर्न नहीं, पैसे की सुरक्षा जरूरी
अगर इनवेस्टर 55 साल की उम्र में 1 से 5 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर लेता है और 60 की उम्र में रिटायर करना चाहता है तो उसे कुछ बातों का खास ध्यान रखना होगा। उसका फोकस एग्रेसिव ग्रोथ की जगह अपने पैसे को बचाने, औसत रिटर्न कमाने और टैक्स सेविंग्स पर होना चाहिए। इसका एक अच्छा तरीका यह है कि अगले पांच साल के खर्च लायक पैसा लो-रिस्क और हाई लिक्विड वाले शॉर्ट टर्म डेट फंड्स या फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाए। इससे पैसे पर मार्केट पर होने वाले उतारचढ़ाव का असर नहीं पड़ेगा।
ऐसे कर सकते हैं फंड का ऐलोकेशन
बाकी पैसे में से 30-40 फीसदी इनफ्लेशन के असर से बचाने के लिए इक्विटी में रखा जा सकता है। 40-50 फीसदी डेट इंस्ट्रूमेंट्स में और बाकी लिक्विड एसेट्स में रखा जा सकता है। रिटायरमेंट करीब आने के साथ-साथ आपको इक्विटी में अपने निवेश को घटाने पर फोकस करना होगा। इसका मतलब है कि आपको पैसा ज्यादा रिस्क वाले ऑप्शन से कम रिस्क वाले ऑप्शन में ट्रांसफर करना होगा।