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Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग में अक्सर लोगों से होती हैं ये 5 गलतियां

व्यक्ति की उम्र जब कम होती है तो वह रिटायरमेंट प्लानिंग को ज्यादा महत्व नहीं देता। उसे लगता है कि इसके लिए काफी वक्त बचा है। उसका ज्यादा फोकस दूसरी जरूरतों पर होता है। इसमें बच्चों की पढ़ाई, कार खरीदना और घर खरीदने जैसी चीजें शामिल होती हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 17, 2026 पर 11:12 PM
Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग में अक्सर लोगों से होती हैं ये 5 गलतियां
मेडिकल सुविधाओं के बढ़ने से व्यक्ति के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना बढ़ी है।

रिटारमेंट प्लानिंग में अक्सर लोगों से कुछ आम तरह की गलतियां होती हैं। इसका अहसास उन्हें तब होता है, जब समय उनके हाथ से निकल चुका होता है। रिटायर हो चुके या रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके लोगों से बात करने से इसका पता चलता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।

रिटायरमेंट प्लानिंग को ज्यादा महत्व नहीं देना

व्यक्ति की उम्र जब कम होती है तो वह रिटायरमेंट प्लानिंग को ज्यादा महत्व नहीं देता। उसे लगता है कि इसके लिए काफी वक्त बचा है। उसका ज्यादा फोकस दूसरी जरूरतों पर होता है। इसमें बच्चों की पढ़ाई, कार खरीदना और घर खरीदने जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि रिटायरमेंट के लिए जरूरी सेविंग्स और इनवेस्टमेंट करने का वक्त उसके हाथ से निकल जाता है। बाद में वह चाहकर भी रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त फंड नहीं जुटा पाता।

यह सोचना कि रिटायरमेंट के बाद खर्च काफी घट जाता है

कई लोग यह सोचते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उनका खर्च घटकर काफी कम रह जाएगा। कुछ हद तक यह बात सही है। लेकिन, पूरी तरह से सच नहीं है। इसकी वजह यह है कि रिटायरमेंट के बाद कुछ खर्च तो घट जाते हैं। लेकिन, कुछ नए तरह के खर्च शुरू हो जाते हैं। इनमें सबसे बड़ा खर्च मेडिकल से जुड़ा है। इलाज का खर्च जिस तरह से बढ़ रहा है, उससे व्यक्ति के कुल खर्च में मेडिकल खर्च की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

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