Get App

Retirement Planning: लाइफ साइकिल फंड से कर सकते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग, जानिए कैसे

लाइफ साइकिल फंड की खासियत यह है कि समय के साथ ऐलोकेशन अपने आप बदलता रहता है। इसका मतलब यह है कि इक्विटी से डेट में फंड को ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी इनवेस्टर की नहीं होती है। लाइफ साइकिल फंड एक सिद्धात का इस्तेमाल करते हैं, जिसे 'ग्लाइड पाथ' (Glide Path) कहा जाता है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Mar 17, 2026 पर 7:57 PM
Retirement Planning: लाइफ साइकिल फंड से कर सकते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग, जानिए कैसे
सेबी के फ्रेमवर्क के तहत लाइफ साइकिल फंड की अवधि पांच से 30 साल तक होती है।

रिटायरमेंट प्लानिंग जितनी आसान दिखती है, उतनी है नही। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टर को रिटायरमेंट की तरफ बढ़ने के साथ-साथ अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करते रहना पड़ता है। जब इनवेस्टर की उम्र कम होती है तो उसके पोर्टफोलियो में शेयरों की हिस्सेदारी ज्यादा होती है। उम्र बढ़ने के साथ पोर्टफोलियो में रिस्क-फ्री एसेट की हिस्सेदारी कम होती जाती है। पोर्टफोलियो में डेट जैसे एसेट की हिस्सेदारी बढ़ती जाती है। ऐसा फंड की सुरक्षा के लिए किया जाता है।

म्यूचुअल फंड की नई कैटेगरी है लाइफ साइकिल फंड

कई लोगों के लिए पोर्टफोलियो में यह एडजस्टमेंट करना मुश्किल होता है। इस प्रॉब्लम का समाधान लाइफ साइकिल फंड्स हैं। यह म्यूचुअल फंड की नई कैटेगरी है, जिसे हाल में सेबी का एप्रूवल मिला है। लाइफ साइकिल फंड का मकसद लॉन्ग टर्म इनवेस्टिंग को आसान बनाना है। खासकर रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड तैयार करना इसका मकसद है।

समय के साथ ऐलोकेशन अपने आप बदलता रहता है

सब समाचार

+ और भी पढ़ें