इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की डेडलाइन 16 सितंबर थी। अंतिम वक्त में रिटर्न फाइल करने में गलती होने की आशंका होती है। कई बार रिटर्न फाइल करने के बाद टैक्सपेयर को लगता है कि वह किसी इनकम के बारे में बताना भूल गया है। कुछ टैक्सपेयर्स से टाइपो मिस्टेक हो जाती है। अगर रिटर्न फाइल करने के बाद ऐसी किसी गलती का पता चलता है तो टैक्सपेयर्स के पास क्या ऑप्शन है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर Income Tax Return फाइल करने के बाद टैक्सपेयर को लगता है कि फाइलिंग में कोई गलती हुई या वह किसी इनकम के बारे में बताना भूल गया है तो उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है। वह रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकता है। अगर टैक्सपेयर रिवाइज्ड रिटर्न फाइल नहीं करता है तो उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है। कई बार टैक्सपेयर फॉरेन एसेट्स या फॉरेन इनकम के बारे में रिटर्न में बताना भूल जाते हैं। इस छोटी सी गलती की उसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
रिवाइज्ड रिटर्न की डेडलाइन
इनकम टैक्स के नियम के मुताबिक, एसेसमेंट ईयर खत्म होने के तीन महीने पहले या एसेसमेंट पूरा होने से पहले, दोनों में से जो पहले हो, Income Tax Return को रिवाइज किया जा सकता है। इसका मतलब है कि किसी टैक्सपेयर को अगर 16 सितंबर के बाद अपने रिटर्न में किसी गलती का पता चलता है या वह किसी इनकम को बताना भूल गया है तो वह 31 दिसंबर, 2025 तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकता है। ध्यान में रखने वाली बात है है कि यह बिलेटेड रिटर्न फाइल करने की भी आखिरी तारीख है।
कोई पेनाल्टी या फीस नहीं लगती
टैक्सपेयर्स के लिए यह जानना जरूरी है कि वह एक बार से ज्यादा अपने रिटर्न को रिवाइज कर सकता है। रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के लिए किसी तरह की पेनाल्टी या फीस नहीं लगती है। टैक्स रिफंड प्रोसेस होने के बाद भी रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जा सकता है। टैक्सपेयर को ऑरिजिनल रिटर्न की तरह रिवाइज्ड रिटर्न को भी वेरिफाय करना जरूरी है। इसे ऑनलाइन सब्मिट करने के 30 दिन के अंदर वेरिफाय करना होगा।
रिवाइज्ड रिटर्न और अपडेटेड रिटर्न में फर्क
कई टैक्सपेयर्स रिवाइज्ड रिटर्न और अपडेटेड रिटर्न के बीच के फर्क को नहीं समझते हैं। इन दोनों के बीच बड़ा फर्क है। रिटर्न को रिवाइज करने का मतलब है कि टैक्सपेयर अपने रिटर्न में किसी तरह का करेक्शन करना चाहता है। यह काम उसी एसेटमेंट इयर में होता है, जिसमें ऑरिजिनल रिटर्न फाइल किया होता है। लेकिन, अपडेटेड रिटर्न एसेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीने के अंदर फाइल किया जा सकता है। इसके लिए टैक्सपेयर को अतिरिक्त टैक्स और पेनाल्टी चुकानी पड़ती है।