SEBI ने Unitech Advisors (India) Pvt Ltd और इसके दो डायरेक्टर्स अजय चंद्रा और संजय चंद्रा पर 1 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई है। उन्हें कुछ साल पहले कई बार अतिरिक्त समय दिए जाने के बावजूद तीन रियल एस्टेट फंडों को बंद नहीं करने का दोषी पाया गया है। पेनाल्टी का पैसा उन्हें मिलकर चुकाना होगा। सेबी ने इस फंड हाउस को कई नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है। इस फंड हाउस का नाम अब Auram Asset Management है। यह पाया गया कि अपनी स्कीम तय समय पर बंद नहीं करने के अलावा Unitech Advisors ने अपनी ग्रुप कंपनियों में निवेशकों का पैसा लगाया था। उसने निवेश के कई ऐसे फैसले लिए जो गलत साबित हुए। उसने अपने ज्यादातर निवेशकों के पैसे वापस नहीं किए। SEBI ने और 10 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई है। इसे संजय चंद्रा और हितेंद्र मल्होत्रा (कंपनी के डायरेक्टर) और दीपक बजाज (यूनिटेक रियल्टी के डायरेक्टर) को चुकाना है।
इन पर भी लगाई गई पेनाल्टी
हितेंद्र मल्होत्रा और दीपक बजाज पर और 10 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई गई है। यह पेनाल्टी निवेशकों की शिकायतों का निपटारान नहीं करने के लिए लगाई गई थी। सेबी ने फंड हाउस के तीन ट्रस्टी-विजय तुलसियान, महेश कुमार शर्मा और राकेश धींगड़ा पर भी 10-10 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई है। मार्केट रेगुलेटर ने यूनिटेक एडवाइजर्स को छह महीने के अंदर तीन रियल्टी फंडों को बंद करने और यूनिटहोल्डर्स को पैसे लौटाने को कहा है।
ये स्कीमें 2006-07 में लॉन्च की गई थी
सेबी ने जांच में यह पाया कि यूनिटेक और इसके फंड मैनेजर्स ने स्कीम की अवधि ऑफर डॉक्युमेंट में तय अवधि से आगे बढ़ा दी थी। इस फंड ने तीन स्कीम लॉन्च की थी। इनमें CIG Realty Funds I, II और IV शामिल थे। इन्हें 2006-07 में लॉन्च किया गया था। ये हाई-रिस्क और हाई-रिटर्न स्कीम थीं, जिन्हें कुछ चुनिंदा निवेशकों को बेचा गया था। यह म्यूचुअल फंड हाउस के न्यू फंड ऑफर की तरह था। इसकी आवधि कुछ महीनों से लेकर कुछ साल तक होती है। फंड मैनेजर्स निवेश के सही मौके दिखने पर नए निवेश के लिए इनवेस्टर्स से कहता है। यह निवेश शेयरों या डेट इंस्ट्रूमेंट्स में किया जाता है। सालाना 15-25 फीसदी रिटर्न पैदा करना स्कीम का मकसद होता है। लेकिन, इस मामले में कहानी कुछ अलग हो गई।
जांच में रियल एस्टेट फंड्स में मिली कई गड़बड़ियां
कई फंड्स के निवेश की वैल्यू घटती गई, क्योंकि देशभर में कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा नहीं किया जा सका। मनीकंट्रोल ने अक्टूबर 2019 में जांच शुरू की थी, जो दो महीने तक चली थी। इससे पता चला कि ऐसे कई रियल-एस्टेट फंड्स में गडबड़ी थी। जांच में रियल एस्टेट फंडों के ऑफर डॉक्युमेंट्स की स्टडी की गई। इनवेस्टर्स को भेजे गए मेल की जांच की गई। कुछ इनवेस्टर्स के पास जो जानकारियां उपलब्ध थीं, उनके आधार पर पोर्टफोलियो की पड़ताल की गई। इन फंडों का कामकाज पारदर्शी नहीं था। इनसे जुड़ी ज्यादा जानकारियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी।