आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज एक्स के प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने ये बॉन्ड्स 11 मार्च, 2020 में इश्यू किए थे। एसजीबी को इश्यू होने की तारीख के पांचवें साल में उस तारीख को रिडीम किया जा सकता है, जिस तारीख में इंटरेस्ट का पेमेंट होता है।
प्रति यूनिट 15,920 रुपये कीमत तय
Sovereign Gold Bond 2029-20 सीरीज एक्स की प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन तारीख 11 मार्च, 2026 है। आरबीआई ने रिडेम्प्शन के लिए प्रति यूनिट 15,920 रुपये कीमत तय की है। यह कीमत अंतिम तीन बिजनेस डेज (6 मार्च, 9 मार्च और 10 मार्च) के गोल्ड के क्लोजिंग प्राइस के औसत के आधार पर तय की गई है।
प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर बंपर मुनाफा
आरबीआई ने जो कीमत तय की है, उस पर एसजीबी की सीरीज एक्स के निवेशकों को प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर करीब 273.7 फीसदी का मुनाफा होगा। इसमें निवेश के पीरियड का इंटरेस्ट अमाउंट शामिल नहीं है। ऐसे इनवेस्टर्स जिन्होंने एसजीबी की इस सीरीज में डिस्काउंटेड ऑनलाइन प्राइस पर निवेश किया था, उनका मुनाफा करीब 278 फीसदी होगा। आरबीआई ने इस सीरीज में प्रति ग्राम 4,260 रुपये पर बॉन्ड इश्यू किया था।
ऑनलाइन पेमेंट पर प्रति ग्राम 50 रुपये डिस्काउंट
सरकार ने एसजीबी की इस सीरीज के निवेशकों ऑनलाइन पेमेंट करने पर प्रति ग्राम 50 रुपये का डिस्काउंट दिया था। एसजीबी के निवेशकों को सालाना 2.5 फीसदी इंटरेस्ट मिलता है। इसका कैलकुलेशन इनवेस्टमेंट अमाउंट पर होता है। इंटरेस्ट का पैसा छमाही आधार पर इनवेस्टर्स के बैंक अकाउंट में क्रेडिट होता है। फाइनल इंटरेस्ट का पेमेंट मैच्योरिटी पर प्रिंसिपल अमाउंट के साथ कर दिया जाता है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स का नियम बदला
इनवेस्टर्स अगर निवेश के पांच साल बाद 31 मार्च, 2026 तक एसजीबी का प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन (आरबीआई के रिडेम्प्शन विंडो) करते हैं तो उन्हें कैपिटल गेंस टैक्स से छूट मिलेगी। 1 अप्रैल, 2026 से यह नियम बदल जाएगा। यूनियन बजट 2026 के मुताबिक, एसजीबी के सिर्फ उन इनवेस्टर्स को कैपिटल गेंस से छूट मिलेगी, जिन्होंने प्राइमरी इश्यू में निवेश किया है और मैच्योरिटी तक बॉन्ड को होल्ड किया है। इसका मतलब है कि सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए एसजीबी पर टैक्स-छूट का फायदा नहीं मिलेगा।
एसजीबी में निवेश 8 साल में मैच्योर हो जाता है
सरकार ने एसजीबी स्कीम की शुरुआत नवंबर 2015 में की थी। इसमें निवेश 8 साल के बाद मैच्योर हो जाता है। मैच्योरिटी के वक्त बाजार में गोल्ड की जो कीमत होती है, उस कीमत के हिसाब से इनवेस्टर्स को मुनाफा होता है। इसके अलावा एसजीबी पर सालाना 2.5 फीसदी का इंटरेस्ट भी इनवेस्टर्स को मिलता है। सरकार ने फरवरी 2024 के बाद से एसजीबी की नई किस्त जारी नहीं की है।