SGB ने कर दिया कमाल! 3 लाख रुपये बन गए 9.25 लाख, RBI ने तय किया 2020-21 सीरीज I का प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस
RBI ने SGB 2020-21 सीरीज I का प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस 14,159 रुपये प्रति यूनिट तय किया है। 4,589 रुपये पर जारी हुए इस बॉन्ड ने करीब 208.54% का रिटर्न दिया है। 3 लाख रुपये का निवेश बिना ब्याज जोड़े करीब 9,25,620 रुपये हो गया है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज I के निवेशक 28 अक्टूबर 2026 को अपना पैसा समय से पहले निकाल सकते हैं।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में पैसा लगाने वालों के लिए अच्छी खबर आई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने SGB 2020-21 सीरीज I का प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस 14,159 रुपये प्रति यूनिट तय कर दिया है। यह वही बॉन्ड है, जो 28 अप्रैल 2020 को ऑनलाइन खरीदारों को 4,589 रुपये प्रति ग्राम में मिला था। इस हिसाब से जिसने उस वक्त इसमें 3 लाख रुपये लगाए थे, उसका पैसा अब करीब 9,25,620 रुपये हो चुका है। ये रकम ब्याज जोड़े बिना है। RBI के मुताबिक निवेशक 28 अक्टूबर 2026 को इस किस्त को समय से पहले भुना सकते हैं।
3 लाख रुपये कैसे बन गए 9.25 लाख?
पूरा खेल दो नंबरों का है। एक, वो भाव जिस पर बॉन्ड खरीदा गया था। दूसरा, वो भाव जिस पर अब इसे बेचा जा सकता है। खरीद का भाव था 4,589 रुपये प्रति ग्राम और आज का भाव है 14,159 रुपये प्रति यूनिट। दोनों के बीच का फर्क है 9,570 रुपये। मतलब हर एक यूनिट पर निवेशक को 9,570 रुपये का सीधा फायदा हो रहा है।
अब इस फायदे को प्रतिशत में देखते हैं। 9,570 रुपये को 4,589 रुपये से भाग देकर 100 से गुणा करें, तो आंकड़ा आता है करीब 208.54%। यानी पैसा तीन गुना से भी ज्यादा हो गया है। जिस निवेशक ने 1 रुपया लगाया था, उसके हाथ में आज 3 रुपये से ऊपर आ रहे हैं।
अब इसी हिसाब को 3 लाख रुपये पर लगाकर देखिए। 3 लाख रुपये पर 208.54% का रिटर्न बनता है करीब 6,25,620 रुपये। इसमें मूल रकम के 3 लाख रुपये जोड़ दें, तो कुल रकम हो जाती है करीब 9,25,620 रुपये। अप्रैल 2020 से अक्टूबर 2026 तक, यानी 6 साल 6 महीने में ये पैसा इस मुकाम तक पहुंचा है।
एक बात और ध्यान देने वाली है। ये पूरा हिसाब सिर्फ सोने के भाव में आई तेजी का है। इस दौरान निवेशक को जो ब्याज मिलता रहा, वो इसमें शामिल नहीं है। यानी असल कमाई इससे भी ज्यादा बैठती है।
14,159 रुपये का भाव आखिर तय कैसे हुआ?
कई निवेशकों के मन में यह सवाल आता है कि RBI रिडेम्पशन का भाव किस आधार पर तय करता है। इसका एक तय तरीका है। RBI के बयान के मुताबिक, इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) 999 शुद्धता वाले सोने का जो क्लोजिंग भाव जारी करता है, उसी को आधार बनाया जाता है। रिडेम्पशन से पहले के 3 कामकाजी दिनों के क्लोजिंग भाव का सिंपल एवरेज निकाला जाता है और वही बॉन्ड का भाव बन जाता है।
इस बार ये 3 दिन थे 23 अक्टूबर, 26 अक्टूबर और 27 अक्टूबर 2026। इन तीनों दिनों के क्लोजिंग भाव का औसत निकाला गया, तो आंकड़ा आया 14,159 रुपये प्रति यूनिट। 24 और 25 अक्टूबर इस गिनती में नहीं आए, क्योंकि हिसाब सिर्फ कामकाजी दिनों का होता है।
इस तरीके का फायदा यह है कि किसी एक दिन के उतार-चढ़ाव का असर निवेशक पर भारी नहीं पड़ता। अगर किसी दिन सोना अचानक गिर जाए या उछल जाए, तो 3 दिन का औसत उस झटके को काफी हद तक बराबर कर देता है। भाव पूरी तरह पारदर्शी रहता है और कोई भी निवेशक इसे खुद समझ सकता है।
5 साल बाद ही क्यों खुलता है समय से पहले निकलने का रास्ता?
SGB कोई ऐसा निवेश नहीं है, जिसे जब मन किया तब तोड़ दिया। इसके कुछ नियम हैं। RBI के बयान के मुताबिक, किसी भी SGB सीरीज को समय से पहले भुनाने की इजाजत इश्यू की तारीख से 5वें साल के बाद मिलती है। वो भी उसी दिन, जिस दिन बॉन्ड पर ब्याज देय होता है।
SGB 2020-21 सीरीज I को 28 अप्रैल 2020 को जारी किया गया था। इसके 5 साल का सफर पूरा हो चुका है और अब 28 अक्टूबर 2026 वो तारीख है, जिस दिन निवेशक इसे भुना सकते हैं। जिन लोगों को अभी पैसे की जरूरत है या जो अपना मुनाफा घर ले जाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक मौका है।
यह फैसला पूरी तरह निवेशक का अपना होता है। RBI ने सिर्फ समय से पहले निकलने का विकल्प दिया है, इसे इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। जो निवेशक बॉन्ड को आगे भी अपने पास रखना चाहते हैं, वो ऐसा कर सकते हैं।
ब्याज की कमाई अलग से
SGB की सबसे खास बात यही है कि इसमें निवेशक को दोहरा फायदा मिलता है। एक तरफ सोने के भाव में तेजी का फायदा, दूसरी तरफ हर साल ब्याज की कमाई। RBI के मुताबिक इन बॉन्ड पर शुरुआती निवेश की रकम पर 2.50% सालाना की फिक्स्ड दर से ब्याज मिलता है।
इसे 3 लाख रुपये के निवेश पर रखकर देखें, तो 2.50% के हिसाब से हर साल 7,500 रुपये का ब्याज बनता है। ध्यान रहे, ये ब्याज शुरुआती निवेश की रकम पर ही मिलता है। सोने का भाव कितना भी बढ़ जाए, ब्याज का आधार वही मूल रकम रहती है।
ऊपर जो 9,25,620 रुपये का आंकड़ा बताया गया है, उसमें ये ब्याज जुड़ा ही नहीं है। यही वजह है कि SGB के निवेशकों की कुल कमाई सिर्फ रिडेम्पशन वैल्यू से कहीं ज्यादा होती है।
एक दिलचस्प जानकारी यह भी है कि हर सीरीज पर ब्याज दर एक जैसी नहीं रही। वित्त वर्ष 2015-16 में जारी हुए SGB पर 2.75% की ब्याज दर दी गई थी। उसके बाद से यह दर 2.50% पर है।
जो लोग पहली बार SGB का नाम सुन रहे हैं, उनके लिए इसे समझना जरूरी है। RBI की वेबसाइट के मुताबिक, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सरकारी सिक्योरिटीज हैं, जिनकी वैल्यू ग्राम में तय होती है। आसान शब्दों में कहें तो यह सोना खरीदने का कागजी तरीका है। घर की अलमारी में सोने का सिक्का या बिस्कुट रखने की जगह निवेशक के पास एक बॉन्ड होता है, जिसकी कीमत सोने के भाव के साथ चलती है।
इसे फिजिकल गोल्ड का विकल्प माना जाता है। न चोरी का डर, न शुद्धता की चिंता और न ही लॉकर का झंझट। निवेशक को खरीदते वक्त इश्यू प्राइस चुकाना होता है। मैच्योरिटी पर यह बॉन्ड भुनाया जाता है और पैसा निवेशक को वापस मिल जाता है।
इस बॉन्ड को जारी करने का काम RBI करता है, लेकिन वो यह काम केंद्र सरकार की तरफ से करता है। यानी इसके पीछे सरकार की गारंटी खड़ी है। SGB 2020-21 सीरीज I के निवेशकों ने इस भरोसे के साथ पैसा लगाया था और आज वही पैसा 3 लाख से बढ़कर करीब 9,25,620 रुपये तक पहुंच गया है।