Silver price crash : मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर शुक्रवार, 30 जनवरी को चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई। कमोडिटीज में ग्लोबल बिकवाली के बीच आज यह कीमती इंडस्ट्रियल मेटल 15% के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। वहीं, गुरुवार 29 जनवरी को इंट्राडे में इसका भाव लगभग 9 फीसदी बढ़कर 4.20 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि कारोबारी सत्र के अंत में 3.99 लाख प्रति किलोग्राम पर क्लोजिंग हुई थी। एनालिस्ट्स ने इस गिरावट की वजह हाल ही में बने ऑल-टाइम हाई के बाद आई प्रॉफिट-बुकिंग और अमेरिकी डॉलर में आई तेज़ी को बताया है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के कमोडिटीज़ एनालिस्ट मानव मोदी का कहना है कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। अमेरिकी डॉलर में रिकवरी से ज़ोरदार प्रॉफिट-टेकिंग हुई है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले सेशन में घरेलू कीमतें इंटरनेशनल बेंचमार्क की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से गिरीं, जिससे कीमतों में समानता को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है।
इंटरनेशनल मार्केट की बात करें अप्रैल डिलीवरी वाला कॉमेक्स सिल्वर वायदा पिछले सेशन में रिकॉर्ड 121.78 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने के बाद लगभग 4 फीसदी गिरकर 110.26 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी की राय है कि निवेशकों द्वारा मुनाफा बुक करने के कारण चांदी अपने ऑल-टाइम हाई से नीचे आ गई है। डॉलर में रिकवरी से भी मेटल पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने आगे कहा कि इस गिरावट के बावजूद, चांदी महीने में 50% से ज़्यादा की बढ़त की ओर बढ़ रही है।
पीएल वेल्थ के हेड, प्रोडक्ट एंड फैमिली ऑफिस राजकुमार सुब्रमण्यम ने लंबे समय के नजरिए पर जोर देते हुए कहा कि भारत में चांदी की कीमतें 2025 की शुरुआत में 1.5-1.6 लाख रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर जनवरी 2026 में 4 लाख रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर हो गई हैं, जो 12 महीनों में हुई लगभग 165-170% की बढ़त है।
सुब्रमण्यम ने आगे कहा कि यह रैली सेफ-हेवन डिमांड में मजबूती, सप्लाई में कमी और सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में बढ़ती इंडस्ट्रियल खपत का मिला-जुला असर है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि चांदी अभी भी वोलेटाइल है। ऐसे में शॉर्ट-टर्म प्राइस रिस्क को मैनेज करने के लिए सोच-समझकर, किस्तों में इन्वेस्टमेंट करने की सलाह होगी।
आज की तेज़ गिरावट के बावजूद, एनालिस्ट्स का कहना है कि सोने और चांदी को आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से फायदा मिल रहा है, जिससे इनमें लंबे समय के निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
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