Silver price today: नए शिखर पर चांदी, एक ही दिन में ₹8000 उछला भाव; क्या आगे भी बढ़ेगी कीमत?
Silver price today: भारत में चांदी की कीमतें ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई हैं। एक ही दिन में 8000 रुपये से ज्यादा का भारी उछाल आया है। ग्लोबल संकेत, सप्लाई संकट और कमजोर रुपये के बीच सवाल है कि क्या चांदी अब 2.40 लाख रुपये तक जाएगी। जानिए एक्सपर्ट से।
Choice Broking के आमिर माकड़ा ने बताया कि चांदी अब WTI क्रूड ऑयल के एक बैरल से भी महंगी हो गई है।
Silver price today: भारत में बुधवार, 17 दिसंबर को चांदी की कीमतें ऑल टाइम हाई पर पहुंच गईं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी ₹8,179 या 4.14 प्रतिशत उछलकर ₹2.05 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई। मंगलवार, 16 दिसंबर को इसका बंद भाव करीब ₹1.97 लाख प्रति किलो था।
MCX पर चांदी की स्पॉट प्राइस भी दोपहर 2.15 बजे तक ₹6,170 बढ़कर ₹2,03,975 के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई थी।
ग्लोबल रैली से मिला सपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी ने घरेलू कीमतों को मजबूती दी। कॉमेक्स पर सिल्वर फ्यूचर्स पहली बार 66 डॉलर प्रति औंस के स्तर के पार निकल गए और 4.65 प्रतिशत की तेजी के साथ 66.27 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखे। सप्लाई टाइट होने और अमेरिका में अगले साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों ने चांदी की कीमतों को सहारा दिया।
कमजोर अमेरिकी डेटा और डॉलर का असर
एनालिस्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों से डॉलर और ट्रेजरी यील्ड पर दबाव बना। इसका सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिला।
Motilal Oswal Financial Services के प्रेशियस मेटल्स एनालिस्ट मानव मोदी ने कहा कि सिल्वर में बैकवर्डेशन सप्लाई की भारी कमी का संकेत देता है। इससे शुरुआती कारोबार में ही कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। बैकवर्डेशन का मतलब होता है कि किसी कमोडिटी की मौजूदा कीमत (Spot Price), उसके फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की कीमत से ज्यादा हो जाए।
कमजोर रुपये से घरेलू बाजार को सहारा
Mehta Equities के राहुल कलंत्री के मुताबिक, इंटरनेशनल बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू कीमतों को कमजोर रुपये से सपोर्ट मिला है। उन्होंने कहा कि आगे अमेरिका से आने वाले CPI और PCE जैसे महंगाई से जुड़े आंकड़े चांदी और अन्य कीमती धातुओं की निकट अवधि की दिशा तय करेंगे।
कच्चे तेल से भी महंगी हुई चांदी
Choice Broking के आमिर माकड़ा ने बताया कि चांदी अब WTI क्रूड ऑयल के एक बैरल से भी महंगी हो गई है। यह स्थिति कई दशकों में पहली बार देखने को मिली है। उनके मुताबिक, यह बदलाव चांदी की बढ़ती रणनीतिक अहमियत को दिखाता है।
माकड़ा ने यह भी कहा कि चांदी लगातार पांचवें साल वैश्विक सप्लाई डेफिसिट में है यानी डिमांड के मुकाबले सप्लाई कम है। साथ ही, कमजोर भारतीय रुपया डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटीज को और महंगा बना रहा है।
निवेश पोर्टफोलियो में बढ़ रही चांदी की भूमिका
PL Wealth के हेड प्रोडक्ट एंड फैमिली ऑफिस राजकुमार सुब्रमण्यम ने कहा कि सोना भले ही अब भी निवेशकों का मुख्य हेज बना हुआ है, लेकिन चांदी ग्लोबल ग्रोथ और एनर्जी ट्रांजिशन पर एक लीवरेज्ड दांव के तौर पर उभर रही है।
उन्होंने कहा कि सोलर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ रही है। रिटेल निवेशक भी चांदी खूब खरीद रहे हैं। ये फैक्टर चांदी को गोल्ड के साथ एक अहम पोर्टफोलियो डाइवर्सिफायर बना रही है।
क्या चांदी 2.40 लाख रुपये तक जाएगी?
Axis Securities का कहना है कि अगर चांदी ₹1.70 लाख से ₹1.78 लाख प्रति किलो के दायरे में आती है, तो यह खरीदारी का बेहतर मौका हो सकता है। Axis Securities ने 2026 के लिए चांदी का टारगेट ₹2.40 लाख प्रति किलो रखा है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, टेक्निकल नजरिए से भी चांदी काफी मजबूत स्थिति में है। 2011 से 2025 तक चला लंबा कंसॉलिडेशन अब खत्म हो चुका है और मंथली चार्ट पर बड़ा ‘राउंडिंग बॉटम ब्रेकआउट’ दिखाई दे रहा है। 20-मंथ और 60-मंथ EMA ऊपर की ओर मुड़े हुए हैं, जबकि कीमतें इन दोनों एवरेज से काफी ऊपर बनी हुई हैं, जो एक नई बुलिश साइकिल की शुरुआती मजबूती का संकेत देता है।
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