पनीर बनाने वाली कंपनी के शेयर में लगा अपर सर्किट, नुवामा ने दिया ₹330 का टारगेट!

Milky Mist Share: मिल्की मिस्ट के शेयर में आज अपर सर्किट लगा। नुवामा ने 330 रुपये के टारगेट के साथ BUY रेटिंग दी है। ब्रोकरेज के मुताबिक FY29 तक कंपनी का रेवेन्यू दोगुना हो सकता है और कर्ज आधे से भी नीचे आ सकता है। जानिए पूरी रिपोर्ट में क्या है

अपडेटेड Oct 27, 2026 पर 2:55 PM
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मिल्की मिस्ट के शेयर में आज 5% का अपर सर्किट लगा.

Milky Mist Share: पनीर, दही और चीज बनाने वाली कंपनी मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड (Milky Mist Dairy Food) के शेयरों में आज तगड़ी खरीदारी दिखी। बाजार खुलने के बाद सुबह 10 बजे शेयर 5% के अपर सर्किट पर 298.75 रुपये पर लॉक हो गया। इसी बीच ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में कंपनी पर कवरेज शुरू की है। ब्रोकरेज ने शेयर को ‘BUY’ रेटिंग दी है और 12 महीने का टारगेट 330 रुपये रखा है।

नुवामा ने क्या कहा?

नुवामा ने रिपोर्ट 272 रुपये के भाव पर तैयार की थी। उस भाव से 330 रुपये का टारगेट 21 फीसदी की बढ़त दिखाता है। शेयर अब 298.75 रुपये पर आ चुका है, इसलिए मौजूदा भाव से टारगेट तक 10.46 फीसदी की गुंजाइश बचती है। ब्रोकरेज ने यह टारगेट सितंबर 2028 के अनुमानित EPS 6.6 रुपये पर 50 गुना वैल्यूएशन लगाकर तय किया है। यह EPS FY28 और FY29 के अनुमानों का औसत है। सेक्टर के मुकाबले रेटिंग 'न्यूट्रल' रखी गई है।


शेयर का 52 हफ्ते का हाई 345 रुपये और लो 165 रुपये है। हिस्सेदारी की बात करें तो, सितंबर 2026 तक प्रमोटरों के पास 79.51 फीसदी, FII के पास 7.50 फीसदी और DII के पास 6.85 फीसदी हिस्सेदारी थी।

3 साल में दोगुना हो सकता है रेवेन्यू

नुवामा मिल्की मिस्ट को भारत की इकलौती ऐसी कंपनी मानता है जो पूरी तरह वैल्यू ऐडेड डेयरी कारोबार में है। कंपनी पैकेट वाला दूध नहीं बेचती, बल्कि दूध से पनीर, चीज, दही, योगर्ट और आइसक्रीम बनाती है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच कंपनी का रेवेन्यू 27 फीसदी, EBITDA 35 फीसदी और EPS 57 फीसदी की सालाना रफ्तार से बढ़ेगा। मुनाफे के लिए यह रफ्तार 67 फीसदी सालाना आंकी गई है।

आंकड़ों में देखें तो FY26 में 3,138.4 करोड़ रुपये का रेवेन्यू FY27 में 4,164.4 करोड़, FY28 में 5,245.1 करोड़ और FY29 में 6,460 करोड़ रुपये तक जा सकता है। इसी दौरान EBITDA 428.6 करोड़ से बढ़कर 1,065.9 करोड़ रुपये और मुनाफा 127 करोड़ से 586.4 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। EPS FY26 के 2 रुपये से FY27 में 3.7, FY28 में 5.6 और FY29 में 7.6 रुपये तक पहुंच सकता है। इसी हिसाब से P/E FY26 के 137.8 गुना से घटकर FY29 में 35.8 गुना रह जाएगा।

कंपनी का पिछला रिकॉर्ड भी इस भरोसे की नींव है। FY24 से FY26 के बीच रेवेन्यू 31 फीसदी और EBITDA 41 फीसदी की सालाना दर से बढ़ा। Q1FY27 में रेवेन्यू सालाना आधार पर 43.6 फीसदी उछला और ग्रॉस मार्जिन 275 बेसिस पॉइंट बढ़कर 34.2 फीसदी पर पहुंचा।

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कहां से होगी मोटी कमाई?

कंपनी की कुल कमाई में करीब 60 फीसदी हिस्सा पनीर, चीज और दही का है। FY26 में इन तीनों से 1,850 करोड़ रुपये आए थे। नुवामा का अनुमान है कि FY29 तक यह आंकड़ा 3,860 करोड़ रुपये होगा। पनीर का रेवेन्यू 920 करोड़ से 1,970 करोड़ रुपये, चीज का 510 करोड़ से 1,100 करोड़ रुपये और दही का 420 करोड़ से 790 करोड़ रुपये तक जा सकता है।

पनीर कंपनी का सबसे बड़ा कारोबार है और FY26 के रेवेन्यू में इसकी हिस्सेदारी 29.4 फीसदी रही। ऑर्गनाइज्ड पैकेज्ड पनीर बाजार में कंपनी का हिस्सा करीब 19 फीसदी है।

IPO के पैसे से घटेगा कर्ज

ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में कंपनी पर 1,670 करोड़ रुपये का कर्ज था और ब्याज 106.3 करोड़ रुपये रहा, जबकि मुनाफा सिर्फ 127 करोड़ रुपये था। प्री-IPO और IPO के पैसे से करीब 640 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया जा रहा है। इसके बाद हर साल करीब 100 करोड़ रुपये चुकाने का अनुमान है।

FY29 तक कर्ज घटकर 720 करोड़ रुपये रह सकता है और ब्याज 53.8 करोड़ रुपये पर आ सकता है। करीब 700 करोड़ रुपये का सस्ता कर्ज कंपनी बनाए रखेगी, क्योंकि उस पर सरकार से करीब 3 फीसदी ब्याज सब्सिडी मिलती है। RoCE 13.4 फीसदी से बढ़कर 20.4 फीसदी होने का अनुमान है। FY26 में फ्री कैश फ्लो निगेटिव था, जबकि FY29 तक FCF/PAT करीब 64 फीसदी तक जा सकता है।

महंगे वैल्यूएशन के बाद भी BUY क्यों?

नुवामा मानता है कि इतनी तेज ग्रोथ की वजह से शेयर महंगा ही बना रहेगा। FY27 के अनुमान पर मिल्की मिस्ट 74 गुना P/E पर है, जबकि हटसन एग्रो 44, नेस्ले 50, ब्रिटानिया 37, डोडला 24, हेरिटेज 22 और पराग मिल्क 20 गुना पर हैं। ब्रोकरेज PEG को बेहतर पैमाना मानता है।

रिपोर्ट के भाव पर मिल्की मिस्ट का PEG करीब 0.7 गुना है, जबकि लिस्टेड डेयरी कंपनियों का औसत 0.8 गुना है। इसका 27 फीसदी का रेवेन्यू CAGR बाकी कंपनियों के 11-14 फीसदी के दायरे का करीब दोगुना है। 50 गुना के टारगेट मल्टीपल पर PEG करीब 0.9 गुना बैठता है। यह डेयरी कंपनियों के औसत से करीब 10 फीसदी ज्यादा है, लेकिन नेस्ले और ब्रिटानिया से करीब 55 फीसदी कम है।

इन खतरों पर रखनी होगी नजर

ब्रोकरेज ने कुछ जोखिम भी गिनाए हैं। कंपनी का पूरा उत्पादन इरोड के पेरुंदुरई के एक ही प्लांट में होता है। महाराष्ट्र के बारामती में 1,130 करोड़ रुपये के प्लांट का MoU 13 जनवरी 2026 को हुआ था, लेकिन इसका काम दिसंबर 2029 में शुरू होने का प्रस्ताव है। FY26 में 94.5 फीसदी दूध तमिलनाडु से आया, इसलिए कमजोर मानसून या पशुओं की बीमारी का असर पूरे कारोबार पर पड़ सकता है।

FY26 के रेवेन्यू में 69.2 फीसदी हिस्सा दक्षिण भारत का रहा और टॉप 10 SKU से 45.7 फीसदी कमाई हुई। Q1FY27 में जनरल ट्रेड की हिस्सेदारी 33 फीसदी, मॉडर्न ट्रेड की 21 फीसदी और ई-कॉमर्स की 19 फीसदी रही। चैनल में आ रहे इस बदलाव के बीच मार्जिन बचाए रखना कंपनी के लिए अहम होगा। दूध के दाम भी बड़ा जोखिम हैं।

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डेयरी बाजार में कितना दम?

रिपोर्ट के मुताबिक भारत का डेयरी बाजार FY26 के 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY31 तक 19.6 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। इसमें वैल्यू ऐडेड डेयरी प्रोडक्ट्स का बाजार 6.1 लाख करोड़ से 11 लाख करोड़ रुपये तक जाने का अनुमान है, यानी 12.4 फीसदी सालाना ग्रोथ। पैकेट वाले दूध के लिए यह रफ्तार करीब 7.8 फीसदी आंकी गई है। 22 सितंबर 2025 से लागू GST बदलाव का फायदा भी कंपनी को मिल रहा है। FY26 में कंपनी के करीब 70 फीसदी रेवेन्यू वाले प्रोडक्ट्स पर टैक्स घटा। पनीर और UHT दूध पर GST शून्य हो गया, जबकि चीज, घी और मक्खन पर 12 से घटकर 5 फीसदी और आइसक्रीम पर 18 से घटकर 5 फीसदी रह गया।

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