Get App

सुप्रीम कोर्ट का अनोखा फैसला! पति के खाते से हर महीने ₹25000 काटे कंपनी, पत्नी के अकाउंट में करे जमा

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में कंपनी को कर्मचारी की सैलरी से हर महीने 25000 रुपये काटकर पत्नी के खाते में भेजने का निर्देश दिया। जानिए अदालत ने यह आदेश क्यों दिया और क्या है पूरा मामला।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Mar 05, 2026 पर 9:32 PM
सुप्रीम कोर्ट का अनोखा फैसला! पति के खाते से हर महीने ₹25000 काटे कंपनी, पत्नी के अकाउंट में करे जमा
सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार कह चुका है कि मेंटेनेंस कोई दान नहीं बल्कि कानूनी अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में एक कंपनी को निर्देश दिया है कि वह अपने कर्मचारी की सैलरी से हर महीने 25,000 रुपये काटे। इस रकम को उसे सीधे कर्मचारी की अलग रह रही पत्नी के बैंक खाते में भेजना होगा। दरअसल, अदालत ने पति को आदेश दिया था कि वह अपनी पत्नी और नाबालिग बेटी को मेंटेनेंस दे। लेकिन, पति इस आदेश का पालन नहीं कर रहा था।

यह आदेश जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने अलग रह रहे दंपती के मामले में दिया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी और नाबालिग बेटी दोनों आर्थिक सहायता की हकदार हैं, लेकिन पति पहले के आदेशों के बावजूद भुगतान नहीं कर रहा था।

मेंटेनेंस दान नहीं, कानूनी अधिकार

Aeddhaas Legal LLP के पार्टनर यथार्थ रोहिला के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार कह चुका है कि मेंटेनेंस कोई दान नहीं बल्कि कानूनी अधिकार है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पत्नी और बच्चे सम्मान के साथ जीवन जी सकें।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें