पिछले पांच वर्षों में सरकार ने टैक्स छूट और रियायतों के जरिए व्यक्तिगत करदाताओं को कॉरपोरेट्स के मुकाबले कहीं ज्यादा राहत दी है। लोकसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह फर्क सिर्फ नीतिगत नहीं बल्कि रेवेन्यू के स्तर पर भी साफ नजर आता है।
लोकसभा में क्या जानकारी दी गई
यह जानकारी एक अस्टार्ड प्रश्न के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में दी। उन्होंने आयकर अधिनियम 1961 के तहत दी गई टैक्स छूट और इंसेंटिव्स का विस्तृत ब्योरा साझा किया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार का फोकस हाल के वर्षों में खासतौर पर मिडिल क्लास को राहत देने पर रहा है।
इंडिविजुअल को कितनी टैक्स छूट मिली
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, FY 2019-20 से FY 2023–24 के बीच व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए दी गई टैक्स रियायतों का कुल रेवेन्यू असर ₹8,69,907.40 करोड़ रहा।
इसके मुकाबले, इसी अवधि में कॉरपोरेट सेक्टर को मिली टैक्स छूट का रेवेन्यू असर ₹4,53,329.08 करोड़ रहा। यह आंकड़ा साफ करता है कि सरकार ने टैक्स राहत का बड़ा हिस्सा आम करदाताओं की ओर शिफ्ट किया है।
नए टैक्स रीजीम पर सरकार की रणनीति
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और ज्यादा लोगों को राहत देने के लिए नए टैक्स रीजीम को लगातार मजबूत किया है। आज स्थिति यह है कि करीब 75 प्रतिशत टैक्सपेयर्स नए टैक्स रीजीम को अपना चुके हैं। सरकार का मानना है कि कम स्लैब, कम जटिलता और सीधी राहत से टैक्स कंप्लायंस बेहतर होता है।
बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट कैसे बढ़ी
नए टैक्स रीजीम में राहत का एक बड़ा आधार बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट में लगातार बढ़ोतरी रही है। यह सीमा पहले ₹2.5 लाख थी, जिसे बजट 2023–24 में ₹3 लाख किया गया और फिर बजट 2025–26 में ₹4 लाख तक बढ़ा दिया गया। इससे लाखों करदाताओं की टैक्स देनदारी सीधे कम हुई है।
सेक्शन 87A से मिली बड़ी राहत
सरकार ने सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स रिबेट को भी काफी बढ़ाया है। पहले जहां ₹7 लाख तक की इनकम पर टैक्स नहीं लगता था, वहीं अब नए टैक्स रीजीम के तहत ₹12 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स देय नहीं है। सैलरीड कर्मचारियों को मिलने वाली स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने पर यह सीमा ₹12.75 लाख तक पहुंच जाती है। यह मिडिल क्लास के लिए अब तक की सबसे बड़ी टैक्स राहत मानी जा रही है।
और कौन से टैक्स सुधार किए गए
इन बड़े बदलावों के अलावा सरकार ने कई छोटे लेकिन असरदार सुधार भी किए हैं। इनमें इनकम टैक्स स्लैब्स में कटौती, स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाना, लीव एनकैशमेंट पर ज्यादा छूट देना, TDS और TCS के नियमों को सरल करना, और सालाना ₹1.25 लाख तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स छूट शामिल हैं। इन सभी कदमों का मकसद टैक्स बोझ कम करना और निवेश को बढ़ावा देना रहा है।
बजट 2025–26 से कितना रेवेन्यू छोड़ा गया
वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि बजट 2025–26 में किए गए टैक्स सुधारों की वजह से ही सरकार को करीब ₹1 लाख करोड़ के डायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू का त्याग करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि यह रेवेन्यू नुकसान जानबूझकर लिया गया फैसला है, ताकि मिडिल क्लास की खरीदने की शक्ति बढ़े, बचत को बढ़ावा मिले और अर्थव्यवस्था में मांग मजबूत हो।