GST के 5 साल : रोजमर्रा की चीजें हुईं सस्ती, सरकार की भी बढ़ी कमाई!

सामान दुकान से आपकी जेब तक सस्ते में आ जाता है। बल्कि फैक्ट्री से दुकानों तक ढुलाई भी काफी आसान और किफायती हो गई है

अपडेटेड Jun 27, 2022 पर 7:34 PM
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पिछले 18 महीने में 50,000 करोड़ रु का GST फ्रॉड पकड़ में आया है

GST यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स के लागू हुए पांच साल पूरे होने को है। 1 जुलाई 2017 को इनडायरेक्ट टैक्स की व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाते हुए जीएसटी लागू किया गया था। इससे ना सिर्फ टैक्स के तौर तरीके बदले बल्कि हमारी आपकी जिंदगी पर भी इसका खासा असर पड़ा है। अपने पांच साल के सफर में GST ने कई उतार चढ़ाव देखे। लेकिन आपकी जेब के लिए जीएसटी वाकई काफी किफायती साबित हुआ है।

आइए जानने की कोशिश करते हैं कि जीएसटी हमारे लिए कितना काम का साबित हुआ है। अगर अभी आप हॉर्लिक्स का एक पैकेट खऱीदते हैं तो आपको 790 रुपए देनें होंगे जो कि MRP है। लेकिन अगर जीएसटी लागू नहीं हुआ होता तो आपको करीब 857 रुपए देने होते। जानते हैं क्यों? पहले इस पर केंद्र औऱ राज्यों के टैक्स मिलाकर कुल 28 फीसदी टैक्स देने होते थे। लेकिन अब सिर्फ 18 फीसदी देने होते हैं। इसी तरह आपको आज जिस टूथपेस्ट को खरीदने पर 253 रु देने होते हैं अगर जीएसटी लागू नहीं हुआ हो तो उसके लिए आपको करीब 272 रुपए देने होते। क्योंकि पहले इस पर केंद्र औऱ राज्यों के टैक्स मिलाकर कुल 27 से 28 फीसदी टैक्स देने होते थे। अब सिर्फ 18 फीसदी जीएसटी लगता है।

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सिर्फ हॉर्लिक्स या टूथ पेस्ट नहीं बल्कि 117 सामान ऐसे हैं जिनका आप रोजमर्रा में इस्तेमाल करते हैं जिनपर टैक्स की दरें घटी हैं। इनमें से तो कई आइटम पर टैक्स लगता ही नहीं है। एम एस मणि, पार्टनर, डेलॉयट इंडिया का कहना है कि पहले केंद्र औऱ राज्य अलग अलग टैक्स लगाते थे। फिर मुंबई जैसे शहरों में ऑक्ट्रॉय लगता था। कुल मिलाकर पहले जहां अधिकांश आइटम पर करीब 28 फीसदी टैक्स लगता था वहीं अब ये 18 फीसदी लगता है।

इतना ही नहीं कि ये सामान दुकान से आपकी जेब तक सस्ते में आ जाता है। बल्कि फैक्ट्री से दुकानों तक ढुलाई भी काफी आसान और किफायती हो गई है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रेसिडेंट कुलतरण सिंह अठवाल का कहना है कि आज से 5 साल पहले हर एक राज्य के बॉर्डर पर घंटों रुकना पड़ता था। दिल्ली से बैंगलोर जाने में 15 नाके पड़ते थे। अब ये सब नहीं है। अगर इस रूट की बात करेंतो 50 लीटर डीजल की बचत हो जाती है।

दूसरी तरफ जीएसटी से सरकार की झोली भी भरी है। 2017-18 (अगस्त-मार्च) में रु 7.18 लाख करोड़ का टैक्स कलेक्शन हुआ। वहीं, 2018-19 में 11.17 लाख करोड़ रुपए, 2019-20 12.22 लाख करोड़ रुपए, 2020-21 में 11.37 लाख करोड़ रुपए और 2021-2022 14.83 लाख करोड़ रुपए का टैक्स कलेक्शन हुआ। जीएसटी लागू होने से टैक्स चोरी पर भी लगाम लगा है। पिछले 18 महीने में 50,000 करोड़ रु का GST फ्रॉड पकड़ में आया है।

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