ITR फाइलिंग: बिना सबूत के टैक्स छूट क्लेम करना पड़ सकता है महंगा

क्लेम के लिए दस्तावेजी सबूत नहीं रहने के बावजूद कई एंप्लॉयीज अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से रिफंड फाइल करने के लिए कहते हैं जो आपको मुश्किल में डाल सकता है। इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस होने के बाद भी अपने कागजात सुरक्षित रखना बेहतर विकल्प है, क्योंकि भविष्य में नोटिस मिलने पर आपके पास बचाव के लिए सबूत होंगे

अपडेटेड Jun 23, 2023 पर 9:43 PM
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AIS में एंप्लॉयर, बैंक, म्यूचुअल फंड और रजिस्ट्रार की तरफ से साझा की गई जानकारी मौजूद होती है।

मान लीजिए कि आप टैक्स छूट के लिए जरूरी दस्तावेज जनवरी या फरवरी में कंपनी में नहीं जमा कर सके। इस वजह से आपके एंप्लॉयर ने आपके वेतन पर ज्यादा टैक्स काट लिया। हालांकि, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय आपके पास काटी गई रकम के लिए रिफंड क्लेम करने का मौका है। आप रिफंड क्लेम करते हैं, लेकिन रेंट एग्रीमेंट या रसीद जमा नहीं करते, क्योंकि रिटर्न फाइल करते वक्त आपको ये दस्तावेज जमा नहीं करने पड़ते।

क्लेम के लिए दस्तावेजी सबूत नहीं रहने के बावजूद कई एंप्लॉयीज अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से रिफंड फाइल करने के लिए कहते हैं। सोमू एंड एसोसिएट्स के फाउंडर और चार्टर्ड अकाउटेंट नागाचंद्रा रेड्डी कहते हैं, 'कई बार एंप्लॉयीज 80DDB, 80U और 80G सेक्शन के तहत रिफंड क्लेम करने के लिए कहते हैं। हालांकि, रिटर्न फाइल करने के लिए दस्तावेज मांगने पर कई ऐसा नहीं कर पाते।'

रेड्डी ने बताया कि उन्होंने ऐसे मामलों में रिटर्न फाइल करने से मना कर दिया, लेकिन कुछ एंप्लॉयी ने खुद से रिटर्न भर लिया। इनकम टैक्स का सेक्शन 80जी चैरिटी वाले संस्थानों को दान पर 50-100 पर्सेंट का टैक्स छूट ऑफर करता है, जबकि शारीरिक रूप से अक्षम टैक्सपेयर्स सेक्शन 80U के तहत 75 से 1.25 लाख तक की कटौती का लाभ ले सकते हैं।


रेड्डी ने कहा, 'इस बात की संभावना है कि इस तरह के रिटर्न को प्रोसेस कर दिया जाए और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स रिफंड भी जारी कर दे। हालांकि, ऐसे मामलों में छह महीने या साल भर बाद स्क्रूटनी होना या नोटिस मिलना तय है। ऐसी स्थिति में, बिना दस्तावेजी सबूत के रिफंड क्लेम करने वाले मुश्किल में फंस सकते हैं।'

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लिहाजा, इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस होने के बाद भी अपने कागजात सुरक्षित रखना बेहतर विकल्प है, क्योंकि भविष्य में नोटिस मिलने पर आपके पास बचाव करने के लिए सबूत होंगे। एन्युअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की वजह से रिटर्न फाइल करने वालों के लिए रिटर्न फॉर्म में दर्ज जानकारी में बदलाव करना मुश्किल है। AIS में एंप्लॉयर, बैंक, म्यूचुअल फंड और रजिस्ट्रार की तरफ से साझा की गई जानकारी मौजूद होती है।

TaxBirbal के डायरेक्टर चेतन चांडक ने बताया, 'AIS में ऐसे ब्यौरे भी होते हैं जिन्होंने कई लोग भूल जाते हैं। इसलिए, इनकम बताने या कटौती क्लेम करने में सही जानकारी नहीं देना आपके लिए बाद में मुश्किल खड़ी कर सकता है। ऐसे में सही-सही जानकारी देना सबसे बेहतर विकल्प है।

वेतनभोगी लोगों का ITR अब ज्यादा जटिल

म्यूचुअल फंड और शेयरों की बढ़ती लोकप्रियता का मतलब है कि बड़ी संख्या में एंप्लॉयीज को अब कैपिटल गेन्स और इक्विटी ट्रेडिंग प्रॉफिट के बारे में भी जानकारी देनी होती है। चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य टैक्स प्रोफेशनल के मुताबिक, इस वजह से रिटर्न फाइलिंग प्रोसेस में ज्यादा वक्त लगता है।

चांडक कहते हैं, 'AIS लोगों की सभी इनकम दिखाता है। उदाहरण के तौर पर पहले कुछ लोग बचत खाते में मिलने वाले ब्याज या किसी तरह के कैपिटल गेन का जिक्र नहीं करते थे। अब सभी ट्रांजैक्शन और इनकम सोर्स का पता लग जाता है। इसलिए, AIS देखने के बाद हम सभी दस्तावेज मांगते हैं और क्लाइंट और चार्टर्ड अकाउंटेंट के बीच जानकारी साझा करने की प्रक्रिया जटिल हो जाती है।'

पिछले कुछ साल में यह देखने को मिला है कि कई एंप्लॉयीज शेयरों के फ्यूचर एंड ऑप्शंस सेगमेंट में भी ट्रेडिंग करने लगे हैं। इस वजह से ज्यादा जानकारी की जरूरत पड़ती है और ITR-3 फॉर्म का भी इस्तेमाल करना पड़ सकता है जो कारोबार और प्रोफेशनल से जुड़े लोगों के लिए होता है।

रेड्डी ने कहा, 'प्रोसेस जटिल हो गई है और एंप्लॉयर (कंपनियां) 15 जून तक फॉर्म 16 जारी करते हैं. ऐसे में रिटर्न की प्रोसेस के लिए हमारे पास सिर्फ 45 दिन बचते हैं। इस तरह, जल्दबाजी में गलती का खतरा रहता है। हम रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त करने की मांग कई बार कर चुके हैं, लेकिन इसे स्वीकार किए जाने की संभावना बेहद कम है।'

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