सरकार ने जीएसटी एमनेस्टी स्कीम को नोटिफाइ कर दिया है। इस बारे में मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने 8 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी कर दिया। यह स्कीम 1 नवंबर, 2024 से खुल जाएगी। इस स्कीम का ऐलान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई में पेश यूनियन बजट में किया था। इस स्कीम का लाभ ऐसे टैक्सपेयर्स उठा सकेंगे, जिनके 1 जुलाई, 2017 से लेकर 31 मार्च, 2020 तक के टैक्स के मामले लंबित हैं। टैक्सपेयर्स इस स्कीम के तहत कम इंटरेस्ट और पेनाल्टी चुकाकर अपने मामले का निपटारा कर सकते हैं।
सिर्फ इंटरेस्ट और पेनाल्टी अमाउंट में राहत मिलेगी
ऐसे टैक्सपेयर्स जिन्हें सेक्शन 73 के तहत (फ्रॉड के मामलों को छोड़) नोटिस या ऑर्डर मिला है, वे ऐसे ऑर्डर के मामले में इस स्कीम का फायदा उठा सकते हैं। टैक्सपेयर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि इस स्कीम के तहत उन्हें सिर्फ इंटरेस्ट और पेनाल्टी के अमाउंट में राहत मिलेगी। उन्हें टैक्स डिमांड अमाउंट चुकाना होगा। इस एमनेस्टी स्कीम के लिए सरकार ने फाइनेंस बिल में सेक्शन 128ए शामिल किया था। इसके तहत सेक्शन 73 के तहत भेजे गए नोटिस के मामले में टैक्सपेयर्स को इंटरेस्ट और पेनाल्टी अमाउंट में राहत देने का प्रावधान है।
अनजाने में गलती करने वाले टैक्सपेयर्स को होगा फायदा
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि सरकार की यह एमनेस्टी स्कीम स्वागतयोग्य है। इसकी वजय है कि 1 जुलाई, 2017 से जीएसटी की व्यवस्था लागू होने पर कई बिजनेसेज को नए नियमों के बारे में ठीक से पता नहीं था। इस वजह से उनकी तरफ से रिटर्न फाइल करने में गलतियां हुई थीं। इसके बाद जीएसटी अथॉरिटीज की तरफ से उन्हें नोटिस भेजे गए थे। यही वजह है कि इस एमनेस्टी स्कीम में सिर्फ FY18 से FY20 की अवधि से जुड़े मामलों में राहत देने का फैसला किया गया है।
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लंबित मामलों की संख्या घटेगी
सरकार का मानना है कि इस एमनेस्टी स्कीम से बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी। साथ ही इससे ट्राइब्यूनल और अदालतों में अपील के मामलों की संख्या में भी कमी आएगी। अभी बड़ी संख्या में ऐसे मामले ट्राइब्यूनल और अदालतों में लंबित है। इससे बिजनेसेज को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे बिजनेसेज कम इंटरेस्ट और पेनाल्टी चुकाकर अपने मामलों का निपटारा कर सकेंगे।