SME कारोबारियों ने कहा, GST से फायदा तो हुआ है लेकिन रेट और जटिलताएं कम होनी चाहिए

छोटे कारोबारियों की राय है कि अगर GST का रेट कम कर दिया जाए और रिटर्न भरने की जटिलताएं कम हो जाएं तो ज्यादा बेहतर है

अपडेटेड Jun 22, 2022 पर 7:37 AM
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GST 2017 में लागू हुआ था जिसके बाद कारोबारियों को एक देश एक टैक्स की सुविधा मिली

GST Rate News: स्मॉल एवं मीडियम (SME) कारोबारियों का कहना है कि 2017 में GST लागू होने से देशभर में एक टैक्स की व्यवस्था तो शुरू हुई लेकिन इसका रेट कम होना चाहिए। इसके साथ ही इसके फ्रेमवर्क को भी मजबूत करने की जरूरत है।

Deloitte India के पार्टनर एमएस मनी ने कहा, "कारोबारियों को हर महीने दो बार रिटर्न फाइल करना पड़ता है। इसकी पूरी प्रक्रिया बेहद जटिल है।"

उन्होंने आगे कहा, "वेंडर के GST पेमेंट के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट होता है। इस पर बायर्स का बहुत कम कंट्रोल है। इसके साथ ही GST पोर्टल पर फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स बहुत जटिल है। खासतौर पर छोटे कारोबारियों के लिए यह काफी मुश्किल है।"


कारोबारियों का कहना है कि GST की वजह से उनके सर्विस का दायरा बढ़ा है। Shilpa Furniture के मालिक मनोज मुनोट ने कहा कि GST से पहले टैक्स से जुड़ी जो दिक्कतें होती थीं अब वह खत्म हो गई हैं। शिल्पा फर्नीचर के तीन आउटलेट महाराष्ट्र के जलगांव में है।

मुनोट का कहना है कि GST कारोबार के लिए अच्छा है लेकिन कई चीजों पर टैक्स का बोझ कम होना चाहिए। हार्मोनाइज्ड सिस्टम पर टैक्स का रेट 50% तक कम होना चाहिए।

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मुनोट ने कहा कि वो इस कारोबार में 40 साल से हैं। उन्होंने कहा, "पहले मैं सिर्फ अपने जिले में अपना सामान बेच पाता था लेकिन अब कोई अड़चन नहीं है। अब मैं ऑनलाइन कहीं भी अपना सामान बेच सकता हूं। एक टैक्स सिस्टम होने के कारण मैं कहीं भी अपना बिजनेस कर सकता हूं।" उन्होंने कहा, अगर टैक्स रेट 18% है तो देशभर में हर जगह बिक्री पर यही टैक्स लगता है।

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