क्रेडिट, डेबिट और को-ब्रांडेड कार्ड से जुड़े इन नियमों को लागू करने के लिए RBI ने दिया 3 महीने का और समय, अब 1 अक्टूबर से होंगे लागू

RBI ने क्रेडिट, डेबिट और को-ब्रांडेड कार्ड के लिए 1 जुलाई 2022 से लागू हो जा रहे नए नियमों में से कुछ खास नियमों को लागू करने की समयसीमा को 3 महीने तक बढ़ा दिया है

अपडेटेड Jun 21, 2022 पर 7:19 PM
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क्रेडिट और डेबिट कार्ड से जुड़े ये नियम अब 3 महीने बाद 1 अक्टूबर से होंगे लागू

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने क्रेडिट (Credit), डेबिट (Debit) और को-ब्रांडेड कार्ड (Co-Branded Card) के लिए 1 जुलाई 2022 से लागू हो जा रहे नए नियमों में से कुछ खास नियमों को लागू करने की समयसीमा को 3 महीने तक बढ़ा दिया है। ये नियम अब 1 जुलाई की जगह 1 अक्टूबर से लागू होंगे।

RBI ने मंगलवार 21 जून को जारी एक बयान में कहा, "इंडस्ट्री से जुड़े तमाम पक्षों की चिंताओं को सुनने और उन पर विचार करने के बाद यह फैसला किया गया है कि कुछ निश्चित प्रावधानों को लागू करने की समयसीमा को बढ़ाकर 1 अक्टूबर 2022 किया जा रहा है।"

मनीकंट्रोल ने इससे पहले 14 जून को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया था कि बैंकों की शीर्ष संस्था इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने कार्ड्स के लिए बनाए गए नए मास्टर डायरेक्शन को लागू करने के लिए छह महीने का और समय मांगा था।


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RBI ने जिन नए नियमों को लागू करने की समयसीमा बढ़ाई हे, उनमें पहला प्रावधान यह है कि अगर एक ग्राहक ने किसी कंपनी का क्रेडिट कार्ड लेने के 30 दिन के अंदर खुद से उसे एक्टिवेट नहीं किया है तो कंपनी को उसे एक्टिवेट करने के लिए ग्राहक से वन-टाइम-पासवर्ड (OTP) के जरिए सहमित लेनी होगी। अगर ग्राहक सहमति नहीं होता है तो उन्हें उसका क्रेडिट कार्ड अकाउंट बंद करना होगा।

दूसरा प्रावधान यह है कि ग्राहक से मंजूरी लिए बिना उसकी क्रेडिट लिमिट को नहीं बढ़ाया जा सकता है। साथ गी अगर कोई भुगतान नहीं किया शुल्क या टैक्स आदि का ब्याज जोड़ते समय कैपिटलाइज नहीं किया जाए।

इस बीच RBI ने उन नियमों को लागू करने में कोी राहत नहीं दी है, जो फिनटेक कंपनियों को प्रभावित करने वाले हैं। इसके अलावा कुछ प्रवाधान को-ब्रांडेड कार्ड के लिए है, जिनमें स्लाइस (Slice), यूनि (Uni), वनकार्ड (OneCard), लेजीपे (Fi), पेयूज (PayU’s), जुपिटर (Jupiter) आदि आते हैं।

नए प्रावधानों में कहा गया कि कार्ड के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी को-ब्रांडिंग पार्टनर को नहीं दी जा सकती है। यह प्रावधान को-ब्रांडेड कार्ड सेगमेंट में ऑपरेट कर रही कंपनियों के बिजनेस मॉडल को प्रभावित कर सकती हैं क्योंकि वे इन ट्रांजैक्शन के आधार पर कस्टमर को विभिन्न तरीके के ऑफर देकर ही लुभाती हैं।

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