टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के कई एंप्लॉयीज को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का डिमांड नोटिस मिला है। इसकी वजह टीडीएस क्लेम में कुछ गड़बड़ है। टीसीएस ने फिलहाल अपने एंप्लॉयीज को टैक्स नहीं चुकाने को कहा है। उन्हें अगले निर्देश तक इंतजार करने को कहा है। यह टैक्स डिमांड 50,000 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये के बीच है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। टीसीएस इंडिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। इसका हेडक्वार्टर मुंबई है।
क्या आईटीआर की प्रोसेसिंग में गलती हुई है?
TCS ने अपने एंप्लॉयीज को भेजे ईमेल में कहा है कि जिन एसोसिएट्स को यह नोटिस मिला है, उन्हें गलती सुधार का आगे एक इंटिमेशन मिलेगा। इसलिए उन्हें टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। कंपनी ने कहा है कि टैक्स अथारिटीज के रेक्टिफिकेशन इंटिमेंशन (Rectification Intimation) भेजने के बाद यह गड़बड़ी ठीक हो जाएगी। सूत्रों ने कहा कि इस बात की संभावना है कि अथॉरिटीज की तरफ से फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न की प्रोसेसिंग में गलती हुई है। एसेसिंग अफसर के पास नोटिस में संशोधन करने का अधिकार होता है।
क्या दोबारा रिटर्न की प्रोसेसिंग से गलती ठीक हो जाएगी?
एंप्लॉयीज को भेजे मेल में कंपनी ने कहा है कि अथॉरिटीज इनकम टैक्स रिटर्न को दोबारा प्रोसेस करेंगे, जिससे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ जारी फॉर्म 26एएस और टीसीएस की तरफ से जारी फॉर्म 16ए के बीच डेटा के बीच फर्क खत्म हो जाएगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से जारी होने वाले फॉर्म 26एएस में इनकम के स्रोत से काटे गए टैक्स (TDS/TCS) की डिटेल जानकारी होती है। फॉर्म 16ए में एंप्लॉयर की तरफ से सैलरी से काटे गए टैक्स की जानकारी होती है।
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क्या एंप्लॉयीज टैक्स एडवाइजर्स से ले सकते हैं सलाह?
टीसीएस ने एक दूसरे मेल में कहा है कि अगर एंप्लॉयीज चाहें तो अपने टैक्स एडवाइजर्स से इस बारे में सलाह ले सकते हैं या कंपनी से संपर्क कर सकते हैं। मनीकंट्रोल ने इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए कंपनी से संपर्क किया है। जवाब मिलने पर यह खबर अपडेट होगी। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 154(2) के मुताबिक, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट दो तरह से नोटिस में संशोधन कर सकता है। पहला, वह खुद इस बारे में पहल कर सकता है। दूसरा, वह एसेसी या टैक्स डिडक्टर के अप्लिकेशन पर संशोधन कर सकता है।