होम लोन का रिपेमेंट पीरियड लंबा होने पर इंटरेस्ट का अमाउंट प्रिंसिपल अमाउंट से ज्यादा हो जाता है। होम लोन लेने वाले कई लोग लोन की अवधि के दौरान प्रीपेमेंट कर इंटरेस्ट पर खर्च होने वाले अमाउंट को कम रखने की कोशिश करते हैं। हाल में इंटरेस्ट रेट बढ़ने के बाद प्रीपेमेंट का ऑप्शन बहुत अट्रैक्टिव हो गया है।
होम लोन के प्रीपेमेंट के लिए ग्राहकों के सामने दो ऑप्शंस हैं। वे EMI घटाने या लोन की अवधि कम करने के ऑप्शंस में से किसी एक का चुनाव कर सकते हैं। EMI घटाने से ग्राहक के हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे। लोन की अवधि घटाने से इंटरेस्ट पर होने वाले कुल खर्च में कमी आएगी, जिससे आपकी सेविंग्स बढ़ेगी।
होम लोन बैलेंस ट्रांसफर (HLBT) फैसिलिटी का इस्तेमाल भी होम लोन के ग्राहक कर सकते हैं। इसमें ग्राहक अपना होम लोन ऐसे बैंक में ट्रांसफर कराता है, जिसका इंटरेस्ट रेट मौजूदा बैंक के मुकाबले कम होता है। कई बार ग्राहक की क्रेडिट प्रोफाइल में इम्प्रूवमेंट की वजह से दूसरा बैंक उसे कम इंटरेस्ट रेट पर लोन देने को तैयार हो जाता है। इंटरेस्ट रेट घटने से इंटरेस्ट पर खर्च होने वाला कुल अमाउंट काफी घट जाता है। इसलिए अगर आपके बैंक ने ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर आपको होम लोन दिया है तो आप इसे दूसरे बैंक में स्विच करने के बारे में सोच सकते हैं।
होम लोन के ग्राहक अगर लोन ट्रांसफर कराने का ऑप्शन सेलेक्ट करते हैं तो वे होम लोन ओवरड्राफ्ट ऑप्शन के बारे में भी सोच सकते हैं। इसमें करेंट या सेविंग अकाउंट के रूप में एक ओवरड्राफ्ट अकाउंट खोला जाता है। होम लोन ग्राहक अपना अतिरिक्त फंड इस अकाउंट में रख सकता है और जरूरत पड़ने पर उसे निकाल सकता है। इंटरेस्ट कैलकुलेशन के दौरान इस ओवरड्राफ्ट अकाउंट का बैलेंस कुल आउटस्टैंडिंग लोन अमाउंट में से घटा दिया जाता है। इससे प्रीपेमेंट का फायदा तो मिलता ही है साथ ही ग्राहक को लिक्विडिटी का भी लाभ मिलता है।
लोन प्रीपेमेंट के लिए कभी इमर्जेंसी फंड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि इमर्जेंसी फंड का इस्तेमाल किसी इमर्जेंसी की स्थिति में होना चाहिए। अगर आपने इसका इस्तेमाल होम लोन के प्रीपेमेंट के लिए कर दिया तो किसी इमर्जेंसी की स्थिति में आपको दिक्कत आ सकती है। तब आपको ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर लोन लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।