नए साल पर विदेश घूमने की प्लानिंग तेज हो रही है, लेकिन बिना ट्रैवल इंश्योरेंस के निकलना जोखिम भरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई यात्री छोटी-मोटी लापरवाही से लाखों का नुकसान झेल लेते हैं। अमेरिका या यूरोप जैसे देशों में एक दिन का अस्पताल खर्च ही 30-50 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि सिंगल ट्रिप पॉलिसी महज 500-2000 रुपये में मिल जाती है। समस्या तब आती है जब कवरेज कम रखा जाता है या जरूरी डिटेल्स छिपाई जाती हैं।
सबसे आम गलती है न्यूनतम कवरेज चुनना। शेंगेन वीजा के लिए 30,000 यूरो (करीब 27 लाख रुपये) का मेडिकल कवर जरूरी है, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसे दोगुना रखें। महंगे इलाकों में ICU बेड का एक दिन का किराया ही पूरी राशि खा सकता है। कई लोग डायबिटीज या हाई BP जैसी पुरानी बीमारियां छिपाते हैं, जिससे क्लेम रद्द हो जाता है। साथ ही, सिर्फ मेडिकल पर फोकस न करें। फ्लाइट डिले पर होटल खर्च, सामान चोरी या खोना, ट्रिप कैंसिलेशन जैसी स्थितियों के लिए भी कवर लें। पॉलिसी में सब-लिमिट चेक करें, वरना कुल कवर ज्यादा होने पर भी क्लेम कम मिलेगा।
यात्रा के प्रकार के हिसाब से पॉलिसी चुनना भी महत्वपूर्ण है। बिजनेस ट्रिप पर लैपटॉप कवर और मिस्ड कनेक्शन जरूरी, जबकि एडवेंचर हॉलिडे के लिए स्कूबा डाइविंग या स्कीइंग जैसी एक्टिविटीज शामिल करें। अमेरिका-यूरोप के लिए हाई मेडिकल कवर, जबकि थाईलैंड-दुबई के लिए बैलेंस्ड प्लान पर्याप्त। बुजुर्गों को कैशलेस हॉस्पिटल नेटवर्क वाली पॉलिसी लेनी चाहिए और सभी मेडिकल हिस्ट्री शेयर करनी चाहिए। डिडक्टिबल (स्वयं वहन राशि) और एक्सक्लूजन (छूटे क्लेम) की फाइन प्रिंट पढ़ना न भूलें।[
एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि इंश्योरेंस खरीदते समय तुरंत एक्टिवेट करें और 24/7 हेल्पलाइन नंबर सेव रखें। क्लेम के लिए डॉक्यूमेंट्स जैसे पासपोर्ट, बिल्स और FIR तुरंत जमा करें। सही प्लानिंग से विदेश यात्रा चिंतामुक्त बन सकती है। एक छोटी सी भूल लाखों में तब्दील न हो जाए।