Union Budget 2026: बजट के इतिहास से जुड़ी खास बातें, जानिये कैसे बदली बजट पेश करने की तारीख?

Union Budget 2026: देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा सबसे अहम दिन 1 फरवरी होता है, जब केंद्र सरकार संसद में आम बजट पेश करती है। 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। क्या आपको पता है कि बजट का क्या इतिहास है और ये कैसे शुरू हुआ

अपडेटेड Dec 27, 2025 पर 7:31 AM
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Union Budget 2026: देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा सबसे अहम दिन 1 फरवरी होता है।

Union Budget 2026: देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा सबसे अहम दिन 1 फरवरी होता है, जब केंद्र सरकार संसद में आम बजट पेश करती है। 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। यह बजट सरकार अगले वित्तीय साल के लिए आय-व्यय का खाका, टैक्स से जुड़े संकेत और नीतिगत दिशा देने का काम करता है। क्या आपको पता है कि बजट का क्या इतिहास है और ये कैसे शुरू हुआ।

भारत में बजट की शुरुआत कैसे हुई

भारत में बजट का इतिहास काफी पुराना है। देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर में जेम्स विल्सन ने पेश किया था। वहीं, आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था। तब से बजट देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा डॉक्यूमेंट बन गया।


सबसे लंबा और सबसे छोटा बजट भाषण

बजट भाषण की बात करें तो मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम एक बड़ा रिकॉर्ड है। उन्होंने 1 फरवरी 2020 को करीब 2 घंटे 42 मिनट तक बजट भाषण दिया, जो अब तक का सबसे लंबा भाषण माना जाता है। तब तबीयत खराब होने के कारण उन्हें भाषण बीच में ही रोकना पड़ा था। इससे पहले जुलाई 2019 में भी उन्होंने करीब 2 घंटे 17 मिनट तक भाषण देकर रिकॉर्ड बनाया था। वहीं, सबसे छोटा बजट भाषण 1977 में वित्त मंत्री हीरूभाई मुल्जीभाई पटेल ने दिया था, जिसमें उन्होंने सिर्फ 800 शब्द बोले थे।

बजट पेश करने का समय कैसे बदला

ब्रिटिश दौर की परंपरा के मुताबिक बजट को शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह परंपरा 1999 तक चली। इसके बाद तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट का समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया। वहीं, 2017 में अरुण जेटली ने एक और बड़ा बदलाव किया और फरवरी के आखिरी वर्किंग डे की जगह 1 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा शुरू की।

बजट की भाषा और पेपरलेस बजट

शुरुआत में बजट सिर्फ अंग्रेजी में पेश किया जाता था, लेकिन 1955 के बाद इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित किया जाने लगा। कोविड महामारी के दौरान 2021-22 का बजट पूरी तरह डिजिटल रहा, जो आजाद भारत का पहला पेपरलेस बजट था।

रेलवे बजट

देश में पहली महिला वित्त मंत्री के तौर पर इंदिरा गांधी ने 1970-71 का बजट पेश किया था। इसके बाद निर्मला सीतारमण 2019 में बजट पेश करने वाली दूसरी महिला बनीं। वहीं, रेलवे बजट को 2017 में केंद्रीय बजट में शामिल कर दिया गया, जिससे 92 साल पुरानी अलग बजट की परंपरा खत्म हो गई।

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