Union Budget 2026: ओल्ड और नई रीजीम के टैक्सपेयर्स को पिछले बजट में क्या-क्या मिला था?

union budget 2026: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2025 को पेश बजट में सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री कर दी थी। उन्होंने कहा था कि इससे टैक्सपेयर्स की सालाना 2 लाख करोड़ रुपये की सेविंग्स होगी। इसके लिए उन्होंने सेक्शन 87ए के तहत रिबेट देना का ऐलान किया था

अपडेटेड Jan 13, 2026 पर 3:23 PM
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यूनियन बजट 2025 में इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए सरकार ने इसके टैक्स स्लैब में बदलाव का ऐलान किया था।

यूनियन बजट 2026 पेश होने में कुछ हफ्तों का समय बचा है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार बजट पेश करेंगी। वह 1 फरवरी यानी रविवार को बजट पेश करेंगी। सीतारमण ने पिछले कुछ सालों में टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कई बड़े उपाय किए हैं। यूनियन बजट 2020 में उन्होंने नई रीजीम का ऐलान किया था। इससे उन इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को काफी फायदा हुआ था, जो डिडक्शन और एग्जेम्प्शन का फायदा नहीं उठाते हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले यूनियन बजट में टैक्सपेयर्स को बड़ा तोहफा दिया था।

सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2025 को पेश बजट में सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री कर दी थी। उन्होंने कहा था कि इससे टैक्सपेयर्स की सालाना 2 लाख करोड़ रुपये की सेविंग्स होगी। इसके लिए उन्होंने सेक्शन 87ए के तहत उन टैक्सपेयर्स को रिबेट देना का ऐलान किया था, जिनकी सालाना इनकम 12 लाख रुपये तक है। नौकरी करने वाले लोगों को इस रिबेट की वजह से सालाना 12.75 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स देने की जरूरत नहीं रह गई है। यह ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह रिबेट सिर्फ इनकम टैक्स की नई रीजीम में मिलता है।

सरकार ने टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया था


यूनियन बजट 2025 में इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए सरकार ने इसके टैक्स स्लैब में बदलाव का ऐलान किया था। नई रीजीम में टैक्स के रेट्स कम हैं। लेकिन, टैक्सपेयर्स को ज्यादातर डिडक्शन और एग्जेम्प्शंस का फायदा नहीं मिलता है। पिछले कुछ सालों में नई रीजीम में इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। इसके नियम आसान हैं। इसमें डिडक्शन और एग्जेम्प्शन नहीं मिलता है, जिससे इनवेस्टमेंट के प्रूफ, रेंट एग्रीमेंट और इंश्योरेंस पेमेंट सर्टिफिकेट जैसे डॉक्युमेंट्स सब्मिट करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

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बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट सालाना 4 लाख रुपये

नई रीजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट 4 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति की इनकम सालाना 4 लाख रुपये है तो उसे टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। 4 से 8 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स का रेट 5 फीसदी है। 8 से 12 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स का रेट 10 फीसदी, 12 से 16 लाख रुपये की इनकम पर 15 फीसदी, 16 से 20 लाख रुपये की इनकम पर 20 फीसदी, 20 से 24 लाख रुपये की इनकम पर 25 फीसदी और 24 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है।

सालाना इनकम                              टैक्स रेट
0 से 4 लाख रुपये तक की इनकम                              टैक्स-फ्री
4 लाख से 8 लाख रुपये तक की इनकम                               5 फीसदी
8 लाख से 12 लाख रुपये तक की इनकम                               10 फीसदी
12 लाख से 16 लाख रुपये तक की इनकम                              15 फीसदी
16 लाख से 20 लाख रुपये तक की इनकम                              20 फीसदी
20 लाख से 24 लाख रुपये तक की इनकम                               25 फीसदी
24 लाख रुपये से ज्यादा इनकम                               30 फीसदी

पुरानी रीजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं 

सरकार ने पिछले साल के यूनियन बजट में ओल्ड टैक्स रीजीम के स्लैब में किसी तरह का बदलाव नहीं किया। इसमें बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट 2.5 लाख रुपये है। 2.5 से 5 लाख रुपये की इनकम पर 5 फीसदी, 5 से 10 लाख रुपये की इनकम पर 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से ज्यादा की इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। इस रीजीम में टैक्स के रेट्स ज्यादा हैं। लेकिन, टैक्सपेयर्स को कई तरह के डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस मिलते हैं। इनमें सेक्शन 80सी, सेक्शन 80डी, सेक्शन 24बी आदि शामिल है।

सालाना इनकम टैक्स रेट
0 से 2.5 लाख रुपये तक इनकम टैक्स-फ्री
2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक इनकम 5 फीसदी
5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक इनकम 20 फीसदी
10 लाख रुपये से ज्यादा इनकम 30 फीसदी

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