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पेरेंट्स की वसीयत रजिस्टर्ड नहीं! अब भाई-बहनों के बीच संपत्ति का कैसे होगा बंटवारा, जानिए क्या कहता है कानून

अगर पेरेंट्स की वसीयत रजिस्टर्ड नहीं है तो संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है? क्या बेटियों का हक खत्म हो जाता है? निजी और पैतृक संपत्ति में फर्क क्या है? जानिए कानून क्या कहता है और कोर्ट ऐसे विवादों में किस आधार पर फैसला करती है।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Jan 28, 2026 पर 3:25 PM
पेरेंट्स की वसीयत रजिस्टर्ड नहीं! अब भाई-बहनों के बीच संपत्ति का कैसे होगा बंटवारा, जानिए क्या कहता है कानून
हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के बाद बेटियों को भी बेटों के बराबर अधिकार मिलते हैं।

भारत में बहुत से परिवारों में संपत्ति को लेकर सबसे बड़ा विवाद वसीयत को लेकर होता है। खासतौर पर तब, जब वसीयत रजिस्टर्ड न हो और वारिसों में बेटियां भी हों। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या बिना रजिस्टर्ड वसीयत कानूनी होती है और ऐसे में संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा।

ऐसा ही एक मामला है, जिसमें पिता के निधन के बाद बेटियों और बेटों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच गया। इस मामले में पाठक ने मनीकंट्रोल से सवाल पूछकर राय मांगी है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

इस मामले में पाठक के पिता का निधन 2022 में हुआ। उनके पिता के पीछे छह बेटियां और पांच बेटे हैं। पिता ने अपने जीवनकाल में एक वसीयत बनाई थी, लेकिन उसे रजिस्टर्ड नहीं कराया।

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