UPI Payments: यूपीआई से पेमेंट्स अभी भी ग्राहकों की पसंद बनी हुई है। यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए लेन-देन लगातार दसवें महीने दिसंबर में 20 लाख करोड़ रुपये के पार रहा। पिछले महीने दिसंबर में यूपीआई के जरिए 23.25 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ जो नवंबर महीने की तुलना में 27.5 फीसदी अधिक रहा। दिसंबर महीने में यूपीआई से लेन-देन नवंबर महीने की तुलना में बढ़ा लेकिन अक्टूबर महीने से कम ही रहा क्योंकि अक्टूबर में यूपीआई के जरिए 23.5 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था।
ट्रांजैक्शन वॉल्यूम पहुंचा रिकॉर्ड हाई पर
दिसंबर में यूपीआई के जरिए 23.25 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ जो नवंबर में हुए लेन-देन से अधिक रहा और अक्टूबर में लेन-देन से कम रहा लेकिन वॉल्यूम की बात करें तो दिसंबर में यह रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। दिसंबर महीने में यूपीआई से ट्रांजैक्शन वॉल्यूम सालाना आधार पर 39 फीसदी उछलकर 1673 करोड़ पर पहुंच गई। हालांकि ग्रोथ की यह स्पीड इस वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीने में 40 फीसदी से अधिक की रफ्तार से कम ही रही।
औसतन लेन-देन में भी हुई बढ़ोतरी
डेली वॉल्यूम की बात करें तो 600 से अधिक बैंकों के नेटवर्क पर हर दिन 54 करोड़ ट्रांजैक्शंस हुए और यूपीआई के जरिए 74,990 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। प्रति ट्रांजैक्शन की वैल्यू में बढ़ोतरी हुई है और दिसंबर तिमाही में यह सितंबर तिमाही में प्रति ट्रांजैक्शन 1393 रुपये से बढ़कर 1400 रुपये पर पहुंच गई।
NPCI ने आंकड़ों के साथ कुछ अहम फैसलों का भी किया ऐलान
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 31 दिसंबर को फोनपे और गूगलपे जैसे दिग्गज यूपीआई ऐप्स को बड़ी राहत दी और मार्केट कैप डेडलाइन को दो साल आगे खिसकाकर दिसंबर 2026 कर दिया है। इसके लागू होने के बाद फोनपे और गूगलपे को मार्केट में अपना दबदबा हल्का करना होगा। एनपीसीआई ने करीब चार साल पहले नवंबर 2020 में एक प्रस्ताव पेश किया था जिसके मुताबिक यूपीआई के जरिए ट्रांजैक्शंस की संख्या पर अधिकतम 30 फीसदी का कैप लगा दिया गया यानी कि किसी एक डिजिटल पेमेंट फर्म के पास 30 फीसदी से अधिक मार्केट शेयर नहीं हो सकता। इसे 2024 के आखिरी से लागू होना था लेकिन एनपीसीआई के बयान के मुताबिक अब यह दिसंबर 2026 के आखिरी में लागू होगा।
अभी सबसे अधिक गूगल पे (Google Pay) और वालमार्ट की फोनपे (PhonePe) का इस्तेमाल होता है। एनपीसीआई के नवंबर के आंकड़ों के मुताबिक यूपीआई पेमेंट्स में फोनपे की हिस्सेदारी 47.8 फीसदी और गूगलपे की 37 फीसदी थी। नवंबर में इन दोनों ने 1310 करोड़ ट्रांजैक्शंस प्रोसेस किए। इसके अलावा एनपीसीआई ने वाट्सऐप के यूपीआई प्रोडक्ट से नए यूजर्स को जोड़ने पर लगी रोक को भी हटा लिया।