सोने और चांदी के निवेशकों को अच्छी खबर मिलने वाली है। अमेरिका और ईरान में लड़ाई शुरू होने से सोने और चांदी की कीमतों को पंख लग सकते हैं। जनवरी के आखिर में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। तब से दोनों ही कीमती मेटल्स अपने ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। खासकर चांदी के निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है। 2 मार्च यानी सोमवार को सोने और चांदी में बड़ी तेजी दिख सकती है।
सोने और चांदी में बढ़ेगी इनवेस्टर्स की दिलचस्पी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। उसने मध्यपूर्व के आधा दर्जन से ज्यादा देशों पर भी हमले किए हैं। बताया जाता है कि उसने इन देशों में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की कोशिश की है। इससे यह लड़ाई काफी भड़कने की स्थिति बनती दिख रही है। इससे सोने और चांदी की चमक बढ़नी तय है। इनवेस्टर्स सोने और चांदी में सुरक्षित निवेश करेंगे। दोनों मेटल्स में निवेश को सबसे सुरक्षित माना जाता है। यही वजह है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर सोने और चांदी की चमक बढ़ जाती है।
सोना 1.70 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई की वजह से अनिश्चितता बढ़ने के आसार हैं। उन्होंने कहा कि सोने और चांदी में 2 मार्च को बड़ा उछाल दिख सकता है। उन्होंने कहा, "गोल्ड में सोने में 5,300 डॉलर प्रति औंस पर रेसिस्टेंस दिख रहा है। अगर यह रेसिस्टेंस लेवल टूट जाता है तो भारत में सोना 1,68,00 से 1,70,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।" बुलियन के निवेशकों की नजरें 2 मार्च को एमसीएक्स में गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स पर होंगी।
चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच सकती है
उन्होंने कहा, "27 फरवरी को कॉमेक्स पर चांदी 93 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई थी। चांदी के लिए 95 डॉलर प्रति औंस पर रेसिस्टेंस है। अगर यह इस रेसिस्टेंस लेवल को तोड़ देती है तो यह 100 डॉलर प्रति औंस के पार जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो इंडिया में चांदी 3,00,000 रुपये प्रति किलो पहुंच जाएगी।" यह चांदी के निवेशकों के लिए बड़ी राहत होगी। जनवरी के अंत में चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के लेवल पर पहुच गई थी। इसके बाद इसमें बड़ी गिरावट आई।
दूसरी कमोडिटीज की कीमतों पर भी पड़ेगा असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि न सिर्फ सोने-चांदी बल्कि दूसरी कमोडिटीज में भी उछाल दिख सकता है। इसकी वजह यह है कि मध्यपूर्व की लड़ाई का असर लॉजिस्टिक्स पर पड़ेगा। होर्मुज की खाड़ी बंद होने से क्रूड और कुछ एग्री कमोडिटीज की सप्लाई बाधित होगी, जिससे उनकी कीमतों में तेजी आएगी।