पश्चिम एशिया तनाव से रियल एस्टेट को भी झटका, जानिए घर खरीदें या अभी इंतजार करने में भलाई

पश्चिम एशिया तनाव से रियल एस्टेट पर दबाव दिख रहा है। लागत बढ़ रही है और खरीदार सतर्क हैं। ऐसे में सवाल है कि अभी घर खरीदना सही रहेगा या इंतजार करना बेहतर होगा। एक्सपर्ट से जानिए जवाब।

अपडेटेड May 02, 2026 पर 11:12 PM
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यूनाइटेड नेशंस का अनुमान है कि 2030 तक भारत की करीब 40 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने लगेगी।

पश्चिम एशिया का तनाव दुनियाभर के देशों की दिक्कतें बढ़ा रहा हैं। इससे एक तरफ सप्लाई चेन में रुकावट आ रही है, तो दूसरी ओर कच्चे तेल और गैस के दाम भी बढ़ रहे हैं। इन सबका असर अलग-अलग बाजारों पर दिख रहा है, जिसमें रियल एस्टेट भी शामिल है। डेवलपर्स, निवेशक और खरीदार सभी की नजर मौजूदा हालात पर है।

रियल एस्टेट सेक्टर इन बाहरी दबावों से पूरी तरह बचा नहीं है। लेकिन, लंबे समय के हिसाब से तस्वीर अच्छी दिखती है। फिलहाल बाजार थोड़ा संभलकर चल रहा है। खरीदार सजग हो गए हैं, लागत बढ़ रही है और कुछ जगहों पर नए प्रोजेक्ट लॉन्च होने में देरी हो रही है।

रियल एस्टेट पर कैसा असर?


पश्चिम एशिया के तनाव से उपजी अनिश्चितता ने बेशक निवेशकों को सजग कर दिया। वो घर खरीदने का फैसला लेने से पहले वैश्विक तनाव और ब्याज दर जैसे सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं। लेकिन, यह भी एक फैक्ट है कि भारत में रियल एस्टेट की मांग सिर्फ आज की नहीं है, बल्कि यह लंबे समय के कई मजबूत कारणों पर टिकी है।

जैसे कि तेजी से हो रहा शहरीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सरकार का सपोर्ट और लोगों की बढ़ती आय। यह जरूर है कि हालिया तनाव ने सेक्टर की रफ्तार को कुछ सुस्त किया है। अलग-अलग सेगमेंट में मांग पहले जैसी तेज नहीं दिख रही। मसलन, अफोर्डेबल हाउसिंग भारत की समावेशी ग्रोथ का अहम हिस्सा है। मगर इसकी ग्रोथ काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है।

यूनाइटेड नेशंस का अनुमान है कि 2030 तक भारत की करीब 40 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने लगेगी। 2011 में यह करीब 31 प्रतिशत थी। जैसे-जैसे शहर बढ़ेंगे, सस्ते घरों की जरूरत और बढ़ेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सरकारी योजनाओं ने डेवलपर्स को बड़े शहरों के साथ-साथ उनके आसपास के इलाकों में भी निवेश के लिए प्रेरित किया है। मतलब साफ है कि मौजूदा झटके के बावजूद रियल एस्टेट सेक्टर के बढ़ने की उम्मीद कायम है।

डिमांड पर भी दिख रहा दबाव

लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट ज्यादा मजबूत बना हुआ है। दिल्ली-एनसीआर, एमएमआर, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में अमीर वर्ग की मांग बनी हुई है। हाई नेट वर्थ लोग अभी भी हाई-एंड प्रॉपर्टी में निवेश कर रहे हैं।

लेकिन कुल मिलाकर रेजिडेंशियल मार्केट में दबाव साफ नजर आ रहा है। Anarock के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण बाजार में सुस्ती आई है। साथ ही, बिल्डर्स और डेवलपर्स के बीच भी थोड़ी हिचक दिख रही है, जिसका असर कंस्ट्रक्शन और नए प्रोजेक्ट लॉन्च पर पड़ रहा है।

अफोर्डेबल बनाम लग्जरी का रुख

तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की समस्याओं के बीच खरीदार अब ज्यादा सोच-समझकर फैसले ले रहे हैं। वे अपने फाइनेंसिंग ऑप्शन पर ध्यान दे रहे हैं। फिक्स्ड प्राइस और तय टाइमलाइन वाले प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं।

लागत में भी बदलाव हो रहा है, लेकिन बाजार की कुल दिशा अभी भी सकारात्मक है। इसके पीछे कुछ मजबूत कारण हैं, जो यह दिखाते हैं कि छोटे समय के उतार-चढ़ाव से लंबे समय पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। जैसे कि हर आय वर्ग में घर खरीदने की चाह बनी हुई है। सरकार की नीतियां और योजनाएं लगातार रियल एस्टेट को सपोर्ट कर रही हैं। बाजार में अलग-अलग कीमतों के विकल्प मौजूद हैं, जिससे जोखिम संतुलित रहता है।

खरीदार-डेवलपर्स के लिए नई सीख

पश्चिम एशिया के संकट ने खरीदारों और डेवलपर्स दोनों को नया सबक दिया है। खरीदार वैश्विक तनाव के कारण अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं। वे ऐसे प्रोजेक्ट चुनना चाहते हैं जिनमें साफ टाइमलाइन हो, कीमत तय हो और सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हों।

दूसरी तरफ डेवलपर्स के लिए जरूरी हो गया है कि वे अपने काम करने के तरीके को बेहतर बनाएं। समय पर प्रोजेक्ट पूरा करना और भरोसा बनाए रखना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

लंबी दौड़ में मजबूत रहेगा सेक्टर

अगर सही प्लानिंग के साथ आगे बढ़ा जाए, तो भारत का रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय में मजबूत बना रहेगा। इसकी वजह है देश के अंदर की मजबूत मांग, सरकार का सपोर्ट और बाजार में मौजूद विविधता।

मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता ग्रोथ को रोकने वाली नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि यह सेक्टर कितना मजबूत है। यह मजबूती अनुशासन से आती है और यही आगे चलकर स्थिर ग्रोथ और खरीदारों को लंबी अवधि का फायदा देगी।

सुस्ती अस्थायी, घबराने की जरूरत नहीं

अभी जो दबाव दिख रहा है, वो सिर्फ अस्थायी है। चाहे वह बढ़ती लागत हो या खरीदारों का कमजोर सेंटिमेंट। रियल एस्टेट सेक्टर सतर्क आशावाद के साथ आगे बढ़ रहा है और वैश्विक दबावों को संभालने में सक्षम है। ऐसे में हमारा मानना है कि खरीदारों को अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

खरीदार रियल एस्टेट को लेकर अपनी योजना पर आगे बढ़ सकते हैं। या तस्वीर के थोड़ा साफ होने का इंतजार कर सकते हैं। क्योंकि लंबी अवधि में रियल एस्टेट सेक्टर की चमक बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है।

(मनीकंट्रोल हिंदी के लिए यह आर्टिकल बेसिक होम लोन के सीईओ और को-फाउंडर अतुल मोंगा ने लिखा है)

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