अक्सर लोग सोचते हैं कि उनके पास पैसे की कमी है.. जबकि हकीकत में यह पैसों की नहीं, बल्कि एनर्जी की कमी होती है। चार्टर्ड अकाउंटेंट और फाइनेंस एजुकेटर CA नितिन कौशिक ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर इसी बात को लेकर एक पोस्ट की जिसपर काफी चर्चा हो रही है। उन्होंने लिखा कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि उन्हें पैसों की समस्या है, जबकि असल में यह मानसिक एनर्जी की समस्या है। पैसा पहले खत्म नहीं होता, एनर्जी पहले खत्म होती है।
थकान से शुरू होता है बेवजह खर्च
कौशिक का मानना है कि इमोशनल थकान लोगों को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर करती है, जो वे सामान्य हालत में नहीं लेते। जब कोई व्यक्ति मानसिक रूप से थका होता है, तो वह अपनी थकान या तनाव दूर करने के लिए बिना सोचे-समझे पैसे खर्च कर देता है। जैसे ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना, टैक्सी बुक करना या ऐसी चीजें खरीदना जिनकी जरूरत नहीं होती।
वह कहते हैं कि यह बात 200 रुपये की कॉफी या 350 रुपये की डिलीवरी चार्ज की नहीं है, बल्कि उस थकान की है जो आपको हर बार स्वाइप करने पर मजबूर करती है। उनके मुताबिक यह अनुशासन की कमी नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति (Willpower) की कमी का नतीजा है, जो थकान से कमजोर पड़ जाती है।
खर्च के पीछे छिपा है इमोशन
CA नितिन कौशिक कहते हैं कि बेवजह खर्च करने की असली वजह इमोशन्स होते हैं। ये बजट की वजह से नहीं होता है। उन्होंने सलाह दी कि लोग सिर्फ खर्च का हिसाब न रखें, बल्कि यह भी लिखें कि खर्च करने से पहले उनका मूड कैसा था।
वह कहते हैं कि अपने खर्च की लिस्ट में एक कॉलम और जोड़ें। ये देखें कि खर्च से पहले वह कैसा महसूस कर रहा थे? आपको खुद पैटर्न नजर आने लगेगा।
उनका अनुमान है कि 70 से 80 प्रतिशत अनचाहे खर्च असल में भावनात्मक थकान से होते हैं। लोग अनजाने में अपनी शांति खरीदने की कोशिश करते हैं।
असली नुकसान - थका हुआ दिमाग और गलत फैसले
नितिन कौशिक का कहना है कि जो लोग रोजाना थकान और तनाव में जीते हैं, वे चाहे जितना भी कमा लें, उन्हें हमेशा पैसों की कमी महसूस होती है। क्योंकि थका हुआ दिमाग सही फैसले नहीं ले पाता और धीरे-धीरे ऐसी आदतें बन जाती हैं जो आर्थिक रूप से नुकसानदायक होती हैं।
वह कहते हैं कि जब दिमाग सर्वाइवल मोड में होता है, तब आप लंबी सोच नहीं रखते। इसलिए सच्चा फाइनेंशियल कंट्रोल अपने मानसिक एनर्जी की रक्षा करने में है, न कि हर रुपये का हिसाब रखने में मदद करता है।
खरीदने से पहले ठहरें
कौशिक एक आसान तरीका बताते हैं कि पैसा खर्च करने से पहले 10-15 मिनट का पॉज लें। इस दौरान न फोन देखें, न किसी से बात करें। वह कहते हैं कि जब दिमाग शांत होता है, तो आधे इम्पल्सिव बायिंग अपने आप रुक जाते हैं। यह आत्म-नियंत्रण नहीं बल्कि क्लैरिटी है, जो मानसिक शांति लौटने पर आती है।
पैसा संभालना यानी एनर्जी संभालना
अंत में वह कहते हैं कि पैसे को संभालना दरअसल अपनी एनर्जी को संभालना है। जब आप अपनी इच्छाशक्ति को सेफ करते हैं, तो आप अपने पैसे की भी रक्षा करते हैं। उनका मानना है कि असली प्रगति तब शुरू होती है जब व्यक्ति रसीदें गिनना छोड़कर शांति के पल गिनना शुरू करता है।
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