सोने-चांदी के क्यों बढ़े भाव, क्या कीमत घटाने के लिए दखल देगी सरकार? वित्त राज्य मंत्री ने दिया जवाब

Gold Silver price: सोना और चांदी अचानक क्यों महंगे हो गए, और क्या सरकार इनके दाम काबू में लाएगी? लोकसभा में इस सवाल पर सरकार ने साफ जवाब दिया। भू राजनीतिक तनाव से लेकर डॉलर तक, जानिए सोना-चांदी महंगा होने की असली वजह और सरकार का प्लान।

अपडेटेड Dec 16, 2025 पर 5:32 PM
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सरकार ने दोहराया कि वह सोने और चांदी की कीमतें तय नहीं करती।

Gold Silver price: सरकार ने सोमवार को संसद में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी की वजहें बताईं। सरकार ने यह भी साफ किया कि वह कीमती धातुओं के भाव को नियंत्रित करने के लिए कोई कदम उठाने जा रही है या नहीं।

DMK सांसदों ने उठाया सोने-चांदी का मुद्दा

लोकसभा में DMK सांसद थिरु अरुण नेहरू और सुधा आर ने यह सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने सोने और चांदी की कीमतों में आई बढ़ोतरी के कारणों का आकलन किया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, इंपोर्ट लागत और रुपये-डॉलर के एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव को शामिल किया गया है।


शादी और त्योहारों में बढ़ते बोझ पर सवाल

सांसदों ने यह भी पूछा कि क्या सरकार ने परिवारों पर पड़ रहे वित्तीय दबाव को नोट किया है। खासकर तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहां सोने का सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व बहुत ज्यादा है। शादी और त्योहारों के मौसम में सोने की मांग और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।

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कीमतें स्थिर करने के लिए क्या कदम उठाए गए

सांसदों ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि कीमतों में उतार-चढ़ाव कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने पूछा कि आगे इसके लिए क्या योजना है।

साथ ही यह सवाल भी किया गया कि क्या इंपोर्ट ड्यूटी घटाने, टैक्स में बदलाव, सब्सिडी या किसी वेलफेयर स्कीम पर विचार किया जा रहा है। मकसद यह जानना था कि सोना और चांदी आम लोगों के लिए कैसे ज्यादा किफायती बनाए जा सकते हैं।

सरकार का गोल्ड-सिल्वर रेट पर जवाब क्या रहा

वित्त मंत्रालय की ओर से जवाब देते हुए राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि देश में सोने और चांदी की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तय होने वाली डॉलर कीमतों पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा रुपये और डॉलर के बीच एक्सचेंज रेट भी अहम भूमिका निभाता है। टैक्स और टैरिफ का असर भी कीमतों पर पड़ता है।

भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी सेफ हेवन डिमांड

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हाल के महीनों में कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। इसके साथ ही दुनिया की आर्थिक ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ी है।

ऐसे माहौल में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है। इससे इसकी मांग बढ़ जाती है। इसमें सेंट्रल बैंकों और बड़ी वैश्विक संस्थाओं की ओर से बड़े पैमाने पर खरीदारी भी शामिल है।

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कीमतों का अलग-अलग राज्यों पर अलग असर

घरेलू असर को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कीमतों में बदलाव का प्रभाव हर राज्य में अलग हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वहां की आबादी सोने और चांदी पर कितनी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक निर्भरता रखती है।

उन्होंने यह भी कहा कि सोना और चांदी सिर्फ उपभोग की वस्तु नहीं हैं। ये निवेश का साधन भी हैं। कीमतें बढ़ने से घरों में पहले से मौजूद सोने-चांदी की नाममात्र वैल्यू बढ़ जाती है।

सरकार गोल्ड-सिल्वर की कीमतें तय नहीं करती

सरकार ने दोहराया कि वह सोने और चांदी की कीमतें तय नहीं करती। हालांकि उपभोक्ताओं को कुछ राहत देने के लिए एक कदम उठाया गया था। जुलाई 2024 में सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई थी।

फिजिकल गोल्ड की मांग घटाने की कोशिश

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि Gold Monetisation Scheme, Sovereign Gold Bonds और गोल्ड ETF जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का मकसद फिजिकल गोल्ड की मांग को कम करना है।

इनके जरिए घरों और संस्थानों के पास पड़ा बेकार सोना सिस्टम में लाया जाता है। इससे इंपोर्ट पर निर्भरता घटती है। बाहरी आर्थिक जोखिम भी कम होता है। इसके अलावा नॉमिनेटेड एजेंसियों, बैंकों और रिफाइनरियों के जरिए बुलियन इंपोर्ट को रेगुलेट किया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है। ग्रे मार्केट गतिविधियों में भी कमी आई है।

खुदरा कीमतों में दखल का कोई इरादा नहीं

सरकार ने अंत में साफ कर दिया कि सोने और चांदी की खुदरा कीमतों में दखल देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार इन्हें रेगुलेट करने की भी योजना नहीं बना रही है।

सरकार के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतें पूरी तरह बाजार की ताकतों के आधार पर तय होती हैं।

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