क्या आप गोल्ड में करना चाहते हैं निवेश? एक गलत कदम आधा कर सकता है सोने पर रिटर्न

Gold Return: सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक साल में गोल्ड ने करीब 80% तक का रिटर्न दिया है। अगर किसी निवेशक ने एक साल पहले सोने में 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज उसकी वैल्यू लगभग 1.8 लाख रुपये हो चुकी होती

अपडेटेड Jan 16, 2026 पर 4:01 PM
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Gold Return: सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है।

Gold Return: सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक साल में गोल्ड ने करीब 80% तक का रिटर्न दिया है। अगर किसी निवेशक ने एक साल पहले सोने में 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज उसकी वैल्यू लगभग 1.8 लाख रुपये हो चुकी होती। यही वजह है कि मौजूदा समय में बड़ी संख्या में निवेशक सोने में निवेश कर रहे हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने सोने में निवेश का गलत तरीका चुना, तो मुनाफे का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला सकता है। कुछ मामलों में टैक्स की मार इतनी ज्यादा होती है कि 30 से 50% तक का फायदा कम हो जाता है। इसलिए सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, बल्कि सही तरीका चुनना भी जरूरी है।

SGB सबसे बेहतर विकल्प क्यों?

लंबे समय में निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को सबसे टैक्स-फ्रेंडली विकल्प माना जाता है। ये बॉन्ड सरकार की ओर से जारी किए जाते हैं और इनमें सालाना 2.5% का ब्याज भी मिलता है, जो गोल्ड की कीमत बढ़ने से अलग होता है। SGB की मैच्योरिटी 8 साल की होती है।


इसका सबसे बड़ा फायदा टैक्स में मिलता है। अगर आप SGB को मैच्योरिटी तक रखते हैं, तो गोल्ड की कीमत बढ़ने से होने वाला पूरा मुनाफा टैक्स फ्री होता है। हालांकि, मिलने वाला सालाना ब्याज आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। अगर कोई निवेशक मैच्योरिटी से पहले SGB बेचता है, तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है।

Gold ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड

जो निवेशक ज्यादा लिक्विडिटी चाहते हैं, उनके लिए Gold ETF और Gold Mutual Fund अच्छे विकल्प माने जाते हैं। Gold ETF में अगर 12 महीने बाद यूनिट्स बेची जाती हैं, तो 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। वहीं, Gold Mutual Fund में लॉन्ग टर्म के पीरियड में 24 महीने होती है।

अगर इन दोनों में तय समय से पहले सेल किया जाता है तो मुनाफा आपकी इनकम में जुड़ जाता है और उस पर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, जो 30% तक भी हो सकता है।

ज्वेलरी, सिक्के या बार के रूप में खरीदा गया फिजिकल गोल्ड टैक्स के लिहाज से सबसे कमजोर विकल्प है। खरीदते समय ही 3% GST देना पड़ता है, जिससे रिटर्न तुरंत कम हो जाता है। डिजिटल गोल्ड पर भी यही GST लगता है। अगर फिजिकल या डिजिटल गोल्ड 24 महीने बाद बेचा जाए, तो 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है। 24 महीने से पहले बेचने पर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। सोने में पैसा लगाना फायदे का सौदा हो सकता है, लेकिन सही निवेश विकल्प चुनना बेहद जरूरी है।

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