Amalaki Ekadashi 2026: फाल्गुन की अंतिम एकादशी के व्रत की सही तारीख जानें, इसी दिन होगी रंगभरी एकादशी की भी पूजा

Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी फाल्गुन मास की अंतिम एकादशी होती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ देवाधिदेव महादेव की भी पूजा की जाती है। इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानें इस साल फाल्गुन मास की अंतिम एकादशी का व्रत किस दिन किया जाएगा

अपडेटेड Feb 19, 2026 पर 7:26 PM
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आमलकी एकादशी में आंवले के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है।

Amalaki Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होती है। ये व्रत पूरे हिंदू वर्ष में 24 बार किया जाता है, यानी हर माह में दो एकादशी तिथियां कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में आती हैं। इस व्रत को भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। साल की इन्हीं 24 एकादशी तिथियों में से एक है आमलकी एकादशी, जो फाल्गुन मास की अंतिम एकादशी तिथि होती है। इस एकादशी का एक नाम रंगभरी एकादशी भी है। इस दिन भक्त काशी में भगवान शिव के साथ विराट होली खेलते हैं। यह एकादशी व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। आइए जानें इस व्रत के बारे में सब कुछ।

आमलकी एकादशी व्रत की तारीख

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के शुक्ल एकादशी तिथि 27 फरवरी रात 12 बजकर 33 पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए इस साल आमलकी एकादशी 27 फरवरी दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी। वहीं, इसका पारण 28 फरवरी दिन शनिवार को सुबह 06 बजकर 47 मिनट से 09 बजकर 06 मिनट के बीच किया जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

आमलकी एकादशी शुक्रवार के दिन पड़ रही है। इस वजह से इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है, क्योंकि शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर 9 बजकर 9 मिनट के बीच पूजा की जा सकती है। आमलकी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी को होगा। इसकी पूजा सुबह 7 बजकर 41 मिनट से लेकर 9 बजकर 8 मिनट के बीच की जा सकती है।

आमलकी एकादशी की पूजा में पहनें पीले रंग के कपड़े


पूजा वाले दिन सुबह उठकर स्नान करें और पीले रंग के कपड़े पहनें। यह भगवान विष्णु का प्रिय रंग है। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा घर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के आगे दीया और धूपबत्ती जलाएं। भगवान को पीले रंग के वस्त्र, पीले फूल, अक्षत और तुलसी अर्पित करें। भोग लगाते वक्त उसमें तुलसी का पत्ता डाल दें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र जाप के साथ-साथ आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें।

आमलकी एकादशी का महत्व

आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं। इस व्रत में आंवले के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले की पूजा भगवान विष्णु के द्वारा ही हुई थी। ऐसे में इस दिन आंवले की पूजा का विशेष महत्व होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार विवाह के बाद पहली बार शिव और पार्वती मां इसी तिथि पर काशी आए थे। इसलिए काशी में भव्य आयोजन होता है और शिव भक्त अपने ईष्ट को अबीर-गुलाल अर्पित कर होली पर्व की शुरुआत करते हैं।

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