बुद्ध पूर्णिमा का दिन हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के लिए अत्यंत पावन और शुभ माना जाता है। ये तिथि वैशाख मास की पूर्णिमा को आती है और भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण – तीनों महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी मानी जाती है। यही कारण है कि बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन को विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। वहीं हिंदू धर्म में भी इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत, पूजा और दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
पंचांग गणना के अनुसार, वर्ष 2025 में बुद्ध पूर्णिमा 12 मई को पड़ रही है। इस शुभ अवसर पर पूजा, स्नान, दान और मंत्रजाप जैसे धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है।
इस दिन वरीयान योग पूरे रातभर रहेगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है।
रवि योग: सुबह 05:32 से 06:17 तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:08 से 04:50 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:33 से 03:27 तक
इन खास समयों में स्नान, दान और पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
चंद्रोदय का समय और अर्घ्य देने का महत्व
पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा का उदय शाम 05:59 बजे होगा। इस समय श्रद्धा से चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
बुद्ध पूर्णिमा की पूजा विधि
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
स्नान में गंगाजल मिलाकर पवित्र स्नान करें।
सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य दें और मंत्र जाप करें।
शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर उनकी स्तुति करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के समक्ष देसी घी का दीपक जलाकर विधिपूर्वक पूजा करें।
ब्राह्मणों को भोजन करवाकर यथाशक्ति दान दें।
जरूरतमंदों की मदद करें और पूरे दिन पुण्य के कार्य करें।
बुद्ध पूर्णिमा पर जाप करने योग्य मंत्र
भगवान विष्णु और लक्ष्मी के मंत्र
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्॥