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Jaya Ekadashi 2026 Vrat Katha: आज जया एकादशी व्रत में जरूर सुनें ये कथा, भगवान विष्णु दूर करेंगे हर विपदा

Jaya Ekadashi 2026 Vrat Katha: जया एकादशी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल ये व्रत आज किया जा रहा है। आज के दिन व्रत की ये कथा जरूर सुननी चाहिए। इसे सुनने से हर मनोकामना पूरी होती है। आइए जानें क्या है ये व्रत कथा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 29, 2026 पर 12:42 PM
Jaya Ekadashi 2026 Vrat Katha: आज जया एकादशी व्रत में जरूर सुनें ये कथा, भगवान विष्णु दूर करेंगे हर विपदा
जया एकादशी व्रत करने वाले भक्तों को भगवान विष्णु के आशीर्वाद से पिशाच योनी से मुक्ति मिलती है।

Jaya Ekadashi 2026 Vrat Katha: एकादशी व्रत को भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के पूरे वर्ष में 24 एकादशी तिथियां आती हैं, यानी हर माह दो एकादशी व्रत होते हैं। इन्हीं में से एक है माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे जया एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख, संपत्ति और समृद्धि प्राप्त होती है। जया एकादशी व्रत करने वाले भक्तों को भगवान विष्णु के आशीर्वाद से पिशाच योनी से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी की व्रत कथा सुनने से हर मनोकामना पूरी होती है।

जया एकादशी व्रत कथा

भगवान श्रीकृष्ण ने महाराज युधिष्ठिर को यह कथा सुनाई थी। उन्होंने बताया कि एक बार इंद्र की सभा में अप्सराएं नृत्य कर रही थीं। उसी सभा में प्रसिद्ध गंधर्व पुष्पवंत, उसकी पुत्री पुष्पवती, चित्रसेन की पत्नी मालिनी और उनका पुत्र माल्यवान भी उपस्थित थे। सभा के दौरान पुष्पवती माल्यवान को देखकर मोहित हो गई। उसके मन में कामभाव जाग उठा। उसने अपने रूप और हाव-भाव से माल्यवान को आकर्षित किया। पुष्पवती के सुंदर रूप से माल्यवान भी उस पर आसक्त हो गया। दोनों अपने वश में न रह सके और अनुचित आचरण में लिप्त हो गए।

जब इंद्र ने यह देखा तो उन्होंने दोनों को अलग करने के लिए नृत्य करने का आदेश दिया। इंद्र की आज्ञा मानकर दोनों नाचने लगे, लेकिन मन में कामभाव होने के कारण वे ठीक से नृत्य नहीं कर पा रहे थे। इंद्र सब समझ गए और क्रोधित होकर उन्होंने दोनों को शाप दे दिया कि वे मृत्यु लोक में जाकर पिशाच योनि में जन्म लेंगे और अपने कर्मों का फल भोगेंगे।

इंद्र के शाप से दोनों हिमालय में पिशाच बनकर दुख भरा जीवन जीने लगे। उन्हें रात भर नींद नहीं आती थी। एक दिन पिशाच ने अपनी पत्नी से कहा कि पता नहीं पिछले जन्म में हमने कौन से पाप किए थे, जिनके कारण हमें यह कष्टदायक जीवन मिला। एक दिन उनकी भेंट देवर्षि नारद से हुई। नारद जी ने उनके दुख का कारण पूछा। तब दोनों ने पूरी कहानी सुना दी। नारद जी ने उन्हें माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने की सलाह दी।

नारद जी की बात मानकर दोनों ने श्रद्धा से जया एकादशी का व्रत किया और पूरी रात भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए जागरण किया। अगले दिन सुबह होते ही भगवान विष्णु की कृपा से उनकी पिशाच देह समाप्त हो गई और वे अपने पूर्व स्वरूप में लौट आए।

इसके बाद दोनों इंद्र लोक पहुंचे और इंद्र को प्रणाम किया। उन्हें पूर्व रूप में देखकर इंद्र भी आश्चर्यचकित हो गए और पूछा कि उन्होंने पिशाच योनि से कैसे मुक्ति पाई। तब दोनों ने जया एकादशी के व्रत की पूरी कथा इंद्र को सुना दी।

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