Margashirsha Masik Shivratri Vrat 2025: मार्गशीर्ष मास का हिंदू धर्म में विशेष्ज्ञ स्थान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ये भगवान श्री कृष्ण का प्रिय महीना है, जिसके बारे में उन्होंने स्वयं गीता में कहा है। इस माह में भी अन्य हिंदू महीनों की तरह शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। मासिक शिवरात्रि का व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है। लेकिन मार्गशीर्ष मास की शिवरात्रि का महत्व और भी अधिक होता है। हर हिंदू महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्र त किया जाता है। इस महीने ये व्रत मंगलवार 18 नवंबर के दिन किया जाएगा। शिवरात्रि को साधना-सिद्धि, मंत्र-सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अत्यंत प्रभावी समय माना गया है। इस महीने की शिवरात्रि पर कई शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है। आइए जानें इस दिन की पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व
मासिक शिवरात्रि व्रत तिथि
मासिक शिवरात्रि व्रत की पूजा निशिता मुहूर्त में करना उत्तम माना जाता है। इसलिए निशिता मुहूर्त के आधार पर इस माह की मासिक शिवरात्रि का व्रत 18 नवंबर के दिन होगा।
पंचांग के अनुसार, मंगलवार को सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा तुला राशि में रहेंगे। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा और राहुकाल का समय दोपहर 2:46 बजे से शुरू होकर शाम 4:6 बजे तक रहेगा।
मासिक शिवरात्रि पर इस बार कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन आयुष्मान योग और सौभाग्य योग बन रहा है। साथ ही, तुला राशि में शुक्र ग्रह के साथ चंद्रमा रहेंगे, जिससे कलात्मक योग बन रहा है। वहीं, सूर्य, मंगल और बुध ग्रह की वृश्चिक राशि में युति से त्रिग्रही योग, बुधादित्य योग और आदित्य मंगल योग का निर्माण हो रहा है। इतने शुभ योग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी कष्ट व परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है।
मासिक शिवरात्रि की पूजा निशिता काल में की जाती है। 18 नवंबर को मासिक शिवरात्रि की पूजा का निशिता मुहूर्त रात 11:40 बजे से देर रात 12:33 बजे तक है। उस समय अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त देर रात 12:07 बजे से लेकर मध्यरात्रि 01:47 बजे तक है।
मासिक शिवरात्रि व्रत का महत्व
मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन कुंवारी कन्याओं को व्रत रखने से महादेव की असीम कृपा रहती है और अच्छे वर की प्राप्ति होती है और विवाहित महिलाओं के व्रत रखने से उनके वैवाहिक जीवन बेहतर बना रहता है।