May Pradosh Vrat: मई के महीने में मिलेगा दो गुरु प्रदोष व्रत का अवसर, जानें किस-किस दिन किया जाएगा व्रत और पूजा विधि

May Pradosh Vrat: प्रदोष हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है और इस दिन प्रदोष काल में पूजा की जाता है। मई के महीने में भी दो प्रदोष व्रत आएंगे, जो गुरुवार के दिन होंगे। आइए जानें इनकी तारीख और पूजा विधि

अपडेटेड May 01, 2026 पर 6:36 PM
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ज्येष्ठ माह में भी दो प्रदोष व्रत आएंगे, जो गुरु प्रदोष व्रत होंगे।

May Pradosh Vrat: आज से अंग्रेजी कैलेंडर का पांचवां महीना शुरू हो गया है। इसके अगले दिन से यानी 2 मई से हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ शुरू हो रहा है। हर हिंदू माह की तरह इसमें भी कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाएगा। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने वाले भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस दिन सूर्यास्त के बाद के दो घंटे, यानी प्रदोष काल में पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत का नाम उस दिन के आधार पर तय होता है, जिस दिन प्रदोष तिथि यानी त्रयोदशी तिथि होती है। मई के दूसरे दिन से शुरू हो रहे ज्येष्ठ माह में भी दो प्रदोष व्रत आएंगे। पंचांग की गणना के अनुसार ये दोनों गुरु प्रदोष व्रत होंगे। यानी ये गुरुवार के दिन किए जाएंगे।

मई में कब है प्रदोष व्रत?

मई के महीने में दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष का पहला प्रदोष व्रत 14 मई यानी गुरुवार को किया जाएगा। वहीं, इस माह का दूसरा प्रदोष व्रत, यानी शुक्ल पक्ष का प्रदोष 28 मई 2026 को पड़ रहा है। इस दिन भी गुरुवार है। ये दोनों व्रत गुरुवार को पड़ रहे हैं, इसलिए इन्हें गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा और इस दिन व्रत का महत्व और ज्यादा रहेगा।

प्रदोष काल का महत्व 

प्रदोष व्रत में पूजा का शुभ समय सूर्यास्त के बाद शाम को होता है, जिसे प्रदोष काल कहते हैं। माना जाता है कि ये समय काफी अच्छा होता है। इस समय पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। जब सूर्यास्त होता है, तो उसके डेढ़ घंटे पहले और बाद में पूजा का ज्यादा सही समय माना जाता है।


प्रदोष व्रत पूजा विधि

इस दिन सुबह नहा कर पूजा करें और फिर दिन भर फलाहार का सेवन करें या तो उपवास रखें। शाम के समय में शिव जी के मंदिर जाए या फिर घर में ही शिवलिंग का अभिषेक करें। साथ ही जल, दूध, शहद, गंगाजल, बेलपत्र और सफेद पुष्प चढ़ाएं। इसके बाद शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या प्रदोष व्रत कथा करें, ये काफी शुभ माना जाता है।

क्यों खास होता है प्रदोष व्रत?

ज्योतिष शास्त्र की मानें, तो अगर प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन होता है तो ये ज्ञान, संतान सुख और आर्थिक मुश्किलों को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान शिव प्रदोष व्रत को नियमित और पूरे विधि-विधान से करने वाले अपने भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

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