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Padmini Ekadashi 2026: यह व्रत करने पर मिलता है अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य, इस पावन दिन राशि अनुसार भगवान विष्णु को चढ़ाएं ये चीजें

Padmini Ekadashi 2026: पद्मिनी एकादशी को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। यह एकादशी अधिक मास में आती है। इस दिन व्रत करने वाले साधकों को अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है। इस पावन दिन भगवान विष्णु को राशि अनुसार चीजें अर्पित करना शुभ माना जाता है। आइए जानें

MoneyControl Newsअपडेटेड May 22, 2026 पर 8:33 PM
Padmini Ekadashi 2026: यह व्रत करने पर मिलता है अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य, इस पावन दिन राशि अनुसार भगवान विष्णु को चढ़ाएं ये चीजें
पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है।

Padmini Ekadashi 2026: पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ एकादशी माना जाता है। यह एकादशी हर हर तीन साल के बाद अधिक मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इसलिए इस एकादशी का महत्व सामान्य एकादशियों से कहीं अधिक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है। मान्यता है कि अधिकमास भगवान विष्णु का प्रिय महीना है। इस महीने में किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति के लिए विशेष: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से सुयोग्य संतान की प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए अचूक माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत में भगवान विष्णु को राशि अनुसार कुछ खास चीजें अर्पित करने से परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। आइए जानें

मेष राशि - भगवान विष्णु को बूंदी के लड्डू चढ़ाएं और तांबे के लोटे में जल भरकर कुमकुम मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।

वृषभ राशि - श्री हरि को सफेद चंदन का तिलक लगाएं। इससे मानसिक शांति मिलेगी।

मिथुन राशि - भगवान विष्णु को तुलसी की माला अर्पित करें और अमरूद या नाशपाती का भोग लगाएं।

कर्क राशि - भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को सफेद फूल चढ़ाएं। इससे मनचाहा फल मिलेगा।

सिंह राशि - श्री हरि को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें। ऐसा करने से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी।

कन्या राशि - भगवान को इलायची और मिश्री अर्पित करें। साथ ही विष्णु चालीसा का पाठ करें।

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