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Parivartini Ekadashi 2026 Rules: गणेश उत्सव के बीच 22 सितंबर को होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें इस दिन बप्पा को मोदक चढ़ाने का क्या है नियम

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाता है। यह व्रत गणेश उत्सव के बीच किया जाएगा। ऐसे में, आइए जानें एकादशी व्रत के दिन बप्पा को पूजा में मोदक चढ़ाना चाहिए या नहीं? क्या है इसका नियम

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 15, 2026 पर 5:13 PM
Parivartini Ekadashi 2026 Rules: गणेश उत्सव के बीच 22 सितंबर को होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें इस दिन बप्पा को मोदक चढ़ाने का क्या है नियम
उदया तिथि के नियम के अनुसार एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा।

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश भगवान अपने भक्तों के बीच आते हैं और 10 दिन तक रहने के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन वापस लौट जाते हैं। इस बीच भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू हो चुका है और 25 सितंबर तक मनाया जाएगा। इससे पहले 22 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। ऐसे भक्तों में इस बात को लेकर दुविधा रहती है कि परिवर्तनी एकादशी के दिन गणेश भगवान को किस चीज का भोग लगाना चाहिए? बप्पा के प्रिय मोदक चावल के आटे से बनते हैं और एकादशी के दिन चावल तो क्या व्रत करने वाले भक्त कोई उपवास करते हैं। आइए जानें गणपति बप्पा को उस दिन सामान्य मोदक या अनाज से बनी मिठाई का भोग लगाया जाए या नहीं?

गणेश उत्सव के दौरान कब है परिवर्तिनी एकादशी?

साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जबकि अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन का मुख्य दिन 25 सितंबर रहेगा। यानी दस दिनों तक गणपति स्थापना रखने वाले घरों और पंडालों में 22 सितंबर को भी बप्पा विराजमान होंगे। पंचांग के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की रात 9:43 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण 23 सितंबर की सुबह किया जाएगा।

एकादशी के दिन गणपति को क्या भोग लगाएं?

महाराष्ट्र में लोकप्रिय उकड़ीचे मोदक मुख्य रूप से चावल के आटे से तैयार किए जाते हैं। वहीं कई जगह गेहूं का आटा, मैदा, सूजी या बेसन इस्तेमाल करके भी मोदक बनाए जाते हैं। मगर एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त इस दिन अन्न का सेवन नहीं करते हैं। इसलिए एकादशी व्रत करने वाले भक्त बप्पा को अर्पित इस भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं कर सकते। गणेश भगवान को भोग लोग अपनी परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के आधार पर अर्पित करते हैं। इसलिए मोदक अर्पित करने को लेकर कोई कठोर नियम नहीं हैं। एकादशी व्रत करने वाले भक्तों के लिए फलाहारी भोग रखना सबसे सरल विकल्प है।

परिवर्तिनी एकादशी पर गणपति को कौन-कौन से भोग लगाएं?

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