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Purushottam Maas 2026 Pradosh Vrat: शनि और चंद्र दोष के लिए अधिक मास में बनेगा ये दुर्लभ संयोग, जानें इस माह कब-कब होंगे प्रदोष व्रत

Purushottam Maas 2026 Pradosh Vrat: अधिक मास में भी सामान्य माह की तरह दो प्रदोष व्रत का संयोग मिलता है। धार्मिक दृष्टि से इस संयोग को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिक मास के प्रदोष व्रत शनि और चंद्र दोष शांत करने का अवसर प्रदान करते हैं। आइए जानें इसके बारे में

MoneyControl Newsअपडेटेड May 20, 2026 पर 7:00 AM
Purushottam Maas 2026 Pradosh Vrat: शनि और चंद्र दोष के लिए अधिक मास में बनेगा ये दुर्लभ संयोग, जानें इस माह कब-कब होंगे प्रदोष व्रत
अधिक मास के प्रदोष व्रत को भगवान शिव और शनि देव की कृपा पाने का प्रमुख अवसर माना जाता है।

Purushottam Maas 2026 Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत प्रत्येक हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। किसी माह में जब अधिक मास लगता है, तो उस माह में प्रदोष व्रत संयोग भी बनता है। यानी एक माह, जो दो माह के बराबर हो जाता है, उसमें 4 प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग प्राप्त होता है। अधिक मास के अतिरिक्त प्रदोष व्रत तीन साल में एक बार मिलने वाला अवसर है। इसे भगवान शिव और शनि देव की कृपा पाने का पवित्र और प्रमुख अवसर माना जाता है।

इस साल अधिक मास का दुर्लभ संयोग ज्येष्ठ माह में बना है। ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत 17 मई से हो चुकी है और यह 15 जून 2026 को समाप्त होगा। माना जाता है कि इस दौरान आने वाले 2 प्रदोष व्रत सभी प्रकार के चंद्र दोष, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली के अन्य दोषों से मुक्ति दिलाते हैं। आइए जानें ज्येष्ठ अधिक मास में दो प्रदोष व्रत कब-कब किए जाएंगे ? इस दौरान शनि और चंद्र दोष ये मुक्ति के लिए क्या उपाय कर सकते हैं?

पहला प्रदोष : 28 मई 2026 गुरुवार को गुरु प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।

दूसरा प्रदोष : 11 जून 2026 शुक्रवार को शुक्र प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।

क्यों खास है यह संयोग

अधिकमास का बल : अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों, दान और पूजा का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है।

शिव-शनि का संबंध : प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जो शनिदेव के गुरु हैं। इसलिए प्रदोष काल में शिव आराधना करने से शनिदेव शांत होते हैं।

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