Sakat Chauth 2026: जनवरी में इस दिन माताएं अपनी संतान के लिए करेंगी गणेश भगवान का व्रत, जानें तिलकुट चतुर्थी की तारीख और महत्व

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ का व्रत माताएं अपनी संतान के संकटों को दूर करने के लिए करती हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ये व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन किया जाता है। आइए जानें जनवरी में ये व्रत किस दिन होगा और इसका महत्व क्या है

अपडेटेड Dec 27, 2025 पर 7:00 AM
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ये व्रत हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है।

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ को साल में आने वाली चार सबसे बड़ी चौथ तिथियों में से एक माना जाता है। ये तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन भगवान गणेश को तिल और गुड़ का भोग लगाया जाता है। सकट चौट पर भगवान गणेश के साथ संकटा माता और चंद्र देव की पूजा कर उन्हें अघ्र्य दिया जाता है। सकट चौथ को माघी चौथ और तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। ये व्रत हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस दिन माताएं अपने संतान की संकटों से रक्षा करने के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करती हैं। आइए जानें इस बार सकट चौथ का व्रत किस दिन किया जाएगा और इसका क्या महत्व है?

6 जनवरी को होगा सकट चौथ का व्रत

पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि वर्ष 2026 में 6 जनवरी 2026 को सुबह 08:01 बजे से शुरू होकर 7 जनवरी 2026 को सुबह 06:52 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए शाम 7:21 बजे से रात 9:03 बजे तक का समय शुभ माना गया है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को तिल से बने लड्डुओं का भोग अर्पित करना विशेष फलदायी होता है।

सकट चौथ का महत्व

सकट चौथ का व्रत संतान की सुरक्षा और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है। यह संकष्टी चतुर्थी है, जिसका व्रत जीवन के कष्टों और संकटों से मुक्ति के लिए रखा जाता है। जो लोग संकष्टी व्रत रखते हैं, उन पर गणेश जी की कृपा होती है और जीवन में शुभता आती है और कार्य सफल होते हैं।

भगवान गणेश को अर्पित करें ये भोग


तिल के लड्डू : सकट चौथ का सबसे मुख्य प्रसाद 'तिलकुटा' है। भुने हुए सफेद या काले तिल को गुड़ के साथ कूटकर बनाए गए लड्डू बप्पा को अर्पित करें। इसे चढ़ाने से शनि और सूर्य की कृपा मिलती है। साथ ही गणेश जी खुश होते हैं।

शकरकंद : सकट चौथ की पूजा में शकरकंद का भोग जरूर शामिल करना चाहिए। ऐसा करने से रिश्तों में मधुरता आती है।

गन्ने और बेर : इस मौसम में मिलने वाले फल जैसे - गन्ना, बेर और अमरूद भी पूजा की थाली में शामिल किए जाते हैं। ऐसा करने से संतान से जुड़ी मुश्किलें दूर होती हैं।

मोदक : "मोदकप्रियं मंगलदायकं" मंत्र के अनुसार गणेश जी को मोदक सबसे अधिक प्रिय हैं। ऐसे में सकट चौथ पर बप्पा को मोदक का भोग जरूर लगाएं। ऐसा करने से जीवन में शुभता का आगमन होता है।

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