Saraswati Puja 2026: देश में इन 5 जगहों पर दिखता है सरस्वती पूजा का असली रंग, जानें कौन से हैं ये शहर

Saraswati Puja 2026:मां सरस्वती को विद्या, कला और स्वर की देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में इनकी पूजा यानी सरस्वती पूजा का दिन बहुत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। हमारे देश में 5 ऐसे शहर हैं, जहां सरस्वती पूजा का असली रंग देखने को मिलता है। आइए जानें कौन से हैं ये पांच शहर

अपडेटेड Jan 19, 2026 पर 8:43 PM
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इस साल बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा।

Saraswati Puja 2026: मां सरस्वती का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। इन्हें ज्ञान, कला और स्वर की देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन इनका प्राकट्योत्व के रूप में मनाया जाता है। हमारे देश में बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। बसंत पंचमी 2026, भारत में वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस साल बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा। यह त्योहार ज्ञान, विद्या और कला की देवी, देवी सरस्वती को समर्पित है। पूरे देश में कपड़े, फूल, भोजन और सजावट के रूप में पीले रंग का बोलबाला रहता है। स्कूल, कॉलेज, मंदिर और घरों में भक्ति और सांस्कृतिक उत्साह के साथ सरस्वती पूजा की जाती है। देश के पांच ऐसे शहर हैं, जहां इसका अलग ही रंग देखने को मिलता है।

कोलकाता, पश्चिम बंगाल

कोलकाता भारत में सरस्वती पूजा समारोह के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगहों में से एक है। इस दिन यहां सजे हुए पंडाल, भक्ति अनुष्ठान और पीले रंग के कपड़े पहने छात्र बड़ी संख्या में देखने को मिलते हैं। स्कूल-कॉलेज मां सरस्वती की मूर्तियां स्थापित करते हैं। परिवार खिचड़ी, बेगुनी और संदेश जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं। दक्षिणेश्वर और बेलूर मठ जैसे मंदिर एक शांतिपूर्ण आध्यात्मिक माहौल बनाते हैं।

जयपुर, राजस्थान

जयपुर में बसंत पंचमी पतंगबाजी के लिए मशहूर है। सुबह से शाम तक छतों पर लोगों की भीड़ रहती है। संगीत की धुनों के बीच रंग-बिरंगी पतंगों से आसमान भर जाता है। बाजार पीले रंग से सजे होते हैं और मंदिर जगमगाते हैं। हल्की-हल्की सर्दियों का मौसम उत्सव में चार चांद लगा देता है।

उज्जैन, मध्य प्रदेश


उज्जैन में बसंत पंचमी का पर्व काफी आध्यात्मिक अंदाज में मनाया जाता है। सुबह-सुबह महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा की जाती है। बड़ी संख्या में भक्त आशीर्वाद लेने के लिए इकट्ठा होते हैं। क्षिप्रा नदी के पास सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इस दिन पोहा और जलेबी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का खूब आनंद लिया जाता है।

वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी में बसंत पंचमी का एक गहरा आध्यात्मिक रंग देखने को मिलता है। गंगा के घाट सुबह और शाम के अनुष्ठानों के दौरान दीयों से जगमगाते हैं। पूरे शहर में मंदिरों, स्कूलों और घरों में सरस्वती पूजा की जाती है। काशी विश्वनाथ मंदिर की यात्रा इस अनुभव में एक पवित्र स्पर्श जोड़ती है।

पंजाब

पंजाब में, बसंत पंचमी को आमतौर पर बसंत कहा जाता है। सरसों के खेत चमकीले पीले फूलों से भरे होते हैं। पतंग उड़ाना इस त्योहार का एक मुख्य आकर्षण है। लोग पीले कपड़े पहनते हैं और परिवार और दोस्तों के साथ पर्व का आनंद लेते हैं। गुरुद्वारों में खास प्रार्थनाएं होती हैं, जबकि पारंपरिक पंजाबी पकवान इस दिन की रोनक बढ़ाते हैं।

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