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Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी में बच्चे को न लगाएं रोली का टीका, जानें किस चीज से करें टीका और रोली न लगाने का क्या है कारण?

Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी की पूजा बुधवार को पूरे विधि-विधान से की जाएगी। इस दिन माताएं अपने बच्चों को हल्दी का टीका लगाती हैं, जबकि आमतौर से लगाए जाने वाले रोली के टीके से परहेज करती हैं। आइए जानें इस का क्या कारण है और शीतला अष्टमी में क्यों नहीं लगाते रोली का टीका

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 10, 2026 पर 2:25 PM
Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी में बच्चे को न लगाएं रोली का टीका, जानें किस चीज से करें टीका और रोली न लगाने का क्या है कारण?
शीतला माता को प्रसन्न करने के लिए हल्दी का टीका लगाना सबसे उत्तम माना जाता है।

Sheetla Ashtami 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का व्रत किया जाता है। ये व्रत माताएं अपनी संतान की अच्छी सेहत और आरोग्यता के लिए करती हैं। शीतला माता को चेचक की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इसलिए ये पर्व चेचक, खसरा और अन्य त्वचा रोगों से मुक्ति से जुड़ा माना जाता है। इस पर्व की सबसे खास बात ये है कि इसमें दिन में ताजा खाना नहीं खाया जाता है। एक दिन पहले यानी सप्तमी की दोपहर, शाम या रात खाना बनाते हैं और अगले दिन उसका भोग माता शीतला को अर्पित करने के बाद भक्त भी वहीं प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसलिए इस पर्व का एक नाम बासोड़ा भी है। इस दिन शीतला माता की पूजा करने के बाद माताएं अपने बच्चों को पारंपरिक रूप से लगाए जाने वाले रोली का तिलक नहीं करती हैं। इस दिन माताएं बच्चों को हल्दी का टीका लगाती हैं। इस परंपरा का धार्मिक और वैज्ञानिक संबंध है। शीतला अष्टमी पर हल्दी का टीका लगाना धर्म और स्वास्थ्य का अनोखा संगम है।

शीतलता प्रदान करने वाली माता हैं शीतला

माता शीतला को शीतलता और ठंडक प्रदान करने वाले देवी कहा जाता है। इनका स्वरूप शांत और करुणामयी है। माना जाता है कि शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजा करने से शरीर में ठंडक बनी रहती है और गर्मी के मौसम से संबंधित बीमारियों से बच्चों की रक्षा होगी। गर्म चीजें माता के शीतल स्वरूप के विपरीत होती हैं। इसलिए इनकी पूजा में गर्म तासीर वाली चीजों का प्रयोग नहीं किया जाता।

इसलिए लगाते हैं हल्दी का टीका

माता को गर्म तासीर वाली चीजें नहीं पसंद हैं, इसलिए इस व्रत में रोली का टीका नहीं लगाया जाता है। शीतला माता शीतल (ठंडी) हैं। लेकिन, ज्योतिष और आयुर्वेद रोली की प्रवृत्ति गर्म मानी गई है। लाल रंग की रोली में चूना, हल्दी और केसर का मिश्रण होता है। रोली लगाने से बच्चे के शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए उनकी पूजा में गर्म तासीर वाली चीजें नहीं चढ़ाई जातीं। शीतला अष्टमी पर केवल हल्दी या चंदन का टीका लगाया जाता है।

शीतल और रोगनाशक होती है हल्दी

आयुर्वेद में हल्दी को शीतल, रोगनाशक और शुद्धिकरण करने वाली माना गया है। आयुर्वेद में हल्दी को त्वचा रोगों में लाभकारी बताया गया है। शीतला माता को प्रसन्न करने के लिए हल्दी का टीका लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह टीका बच्चे में नकारात्मक ऊर्जा, दुष्ट दृष्टि और रोगों से रक्षा करता है। इससे बच्चे की एकाग्रता बढ़ती है और मन शांत रहता है। शीतला अष्टमी पर हल्दी का टीका लगाने से बच्चे का शरीर शीतल रहता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और माता शीतला की कृपा से लंबी आयु व अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।

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