Sheetla Ashtami 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का व्रत किया जाता है। ये व्रत माताएं अपनी संतान की अच्छी सेहत और आरोग्यता के लिए करती हैं। शीतला माता को चेचक की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इसलिए ये पर्व चेचक, खसरा और अन्य त्वचा रोगों से मुक्ति से जुड़ा माना जाता है। इस पर्व की सबसे खास बात ये है कि इसमें दिन में ताजा खाना नहीं खाया जाता है। एक दिन पहले यानी सप्तमी की दोपहर, शाम या रात खाना बनाते हैं और अगले दिन उसका भोग माता शीतला को अर्पित करने के बाद भक्त भी वहीं प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसलिए इस पर्व का एक नाम बासोड़ा भी है। इस दिन शीतला माता की पूजा करने के बाद माताएं अपने बच्चों को पारंपरिक रूप से लगाए जाने वाले रोली का तिलक नहीं करती हैं। इस दिन माताएं बच्चों को हल्दी का टीका लगाती हैं। इस परंपरा का धार्मिक और वैज्ञानिक संबंध है। शीतला अष्टमी पर हल्दी का टीका लगाना धर्म और स्वास्थ्य का अनोखा संगम है।
