Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, जिसके कई बार दुर्लभ और खूबसूरत दृश्य देखने को मिलते हैं। एस्ट्रोनॉमी में दिलचस्पी रखने वाले सभी लोग इस मौके को शोध और अध्ययन का बेहतरीन मौका मानते हैं। लेकिन, हमारे देश में इसका धार्मिक महत्व भी है और ग्रहण के शुरू होने से पहले और उसके बाद के कई नियम हैं, जिनका पालन किया जाता है।
जैसे ग्रहण शुरू होने से कई घंटों पहले सूतक काल लगता है, ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, खाना-पीना, सोना वर्जित रहता है और ग्रहण समाप्त होने के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण आदि। ऐसे कई लोगों के मन में ये सवाल भी उठता है कि ग्रहण के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना उचित है या नहीं? सवाल है, तो जवाब भी होगा। भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा ने लोकल 18 को इस बारे में ये बताया है
रोज सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा
भारतीय संस्कृति में सूर्य को रोज सुबह तांबे के लोटे से अर्घ्य देने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य को नियमित अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और सेहत बेहतर रहता है।
क्या सूर्य ग्रहण के दौरान अर्घ्य देना ठीक है?
साल का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में
साल का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में लगेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जो फाल्गुन महीने की अमावस्या तिथि यानी 17 फरवरी, 2026 को होगा। यह ग्रहण धनिष्ठा नक्षत्र में और कुंभ राशि में लगेगा। यह ग्रहण दोपहर 03:26 बजे शुरू होगा और शाम 07:57 बजे समाप्त होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
ग्रहण काल में “ॐ सूर्याय नमः” सूर्य मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देना शुभ होता है।
क्या ग्रहण के बाद दे सकते हैं अर्घ्य?
सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके घर और पूजा स्थल की शुद्धि की जाती है। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देना फिर से शुरू किया जा सकता है। अगर ग्रहण दोपहर से पहले समाप्त हो रहा हो, तो उसी दिन अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि ग्रहण के बाद सूर्य की ऊर्जा फिर से पूर्ण रूप में सक्रिय हो जाती है, इसलिए उस समय किया गया अर्घ्य विशेष फलदायी होता है।