Tulsi Vivah 2025: 2 नवंबर को होगा तुलसी विवाह, जानें इस पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा और महत्व

Tulsi Vivah 2025: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह को बहुत उत्तम दिनों में से एक माना जाता है। भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा से जागने के बाद ये पर्व मनाया जाता है। इसी दिन से हिंदू धर्म में मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। आइए जानें इस साल ये पर्व किस दिन होगा और इसकी पौराणिक कथा

अपडेटेड Oct 21, 2025 पर 9:54 PM
इस साल ये पर्व 02 नवंबर रविवार के दिन मनाया जाएगा।

Tulsi Vivah 2025: तुलसी विवाह का पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु का तुलसी जी के साथ विवाह होता है। इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी के दिन चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं और संसार का कामकाज फिर से संभालते हैं। इसके अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह होता है और इसी के साथ हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इस साल ये पर्व 02 नवंबर रविवार के दिन मनाया जाएगा। आइए जानें इसकी सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा।

तुलसी विवाह तारीख : इस साल तुलसी विवाह रविवार, 2 नवंबर 2025 को होगा। पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 2 नवंबर 2025 को सुबह 7:31 बजे शुरू होगी और 3 नवंबर 2025 को सुबह 5:07 बजे द्वादशी तिथि समाप्त होगी।

शुभ मुहूर्त : इस दिन पूजा के लिए पूरे दिन में ये मुहूर्त अच्छे रहेंगे

ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:50 बजे से सुबह 05:42 बजे तक

विजय मुहूर्त - दोपहर 01:55 बजे से दोपहर 02:39 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त - शाम 05:35 बजे से शाम 06:01 बजे तक


निशिता मुहूर्त - रात 11:39 बजे से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीनकाल में जालंधर नामक एक बहुत पराक्रमी राक्षस था। जालंधर पराक्रमी होने के साथ ही वीर भी था। उसकी वीरता का रहस्य था, उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म। अपनी पत्नी के व्रत के प्रभाव से ही जालंधर अजेय बन गया था। उसके आंतक और अत्याचार से परेशान होकर देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की गुहार लगाई। सभी देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने के लिए उसके पति जालंधर का वेश धर कर उसके पास चले गए और छल से वृंदा को स्पर्श कर लिया। राक्षस जालंधर इस समय देवताओं से युद्ध कर रहा था। लेकिन वृंदा का सतीत्व भंग होते ही वह युद्ध में मारा गया। वृंदा का सतीत्व भंग होते ही उसके पति का कटा हुआ सिर उसके आंगन में आ गिरा। यह देखकर वृंदा क्रोधित हो उठी। उसने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि, ‘जिस तरह आपने छल से मेरे पति का वियोग दिया है उसी प्रकार आपको भी मृत्यु लोक में जन्म लेकर पत्नी वियोग सहना पड़ेगा।’ इतना कहने के बाद वृंदा अपने पति के साथ सती हो गई। ऐसा कहा जाता है कि वृंदा के श्राप से ही भगवान विष्णु ने त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने अयोध्या में जन्म लिया और उन्हें सीता माता का वियोग सहना पड़ा था। जिस जगह वृंदा सती हुई थी वहां पर तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ।

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