Vaishakh Second Pradosh Vrat 2026: हिंदू कैलेंडर के हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष में कुछ महत्वपूर्ण व्रत आते हैं। इनमें एकादशी व्रत और त्रयोदशी यानी प्रदोष व्रत विशेष स्थान रखते हैं, क्योंकि ये हर माह दो बार किए जाते हैं। ये व्रत पूरे साल करने से भगवान की कृपा से जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। एकादशी व्रत जहां भगवान विष्णु को समर्पित है वहीं प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस व्रत का नाम उस दिन से तय होता है, जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है। जैसे सोमवार को त्रयोदशी तिथि पड़ने पर सोम प्रदोष व्रत और मंगलवार को त्रयोदशी तिथि पड़ने पर भौम प्रदोष व्रत किया जाता है।
इस समय हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना वैशाख का शुक्ल पक्ष चल रहा है। इसमें वैशाख माह का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत किया जाएगा। इसकी तारीख को लेकर भक्तों में भ्रम है, क्योंकि इसकी तिथि दो दिनों को छू रही है। इसलिए आइए जानें इस साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम प्रदोष व्रत किस दिन किया जाएगा और इसका पूजा का मुहूर्त कब से कब तक है ?
28 या 29 अप्रैल कब होगा प्रदोष व्रत?
पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल को शाम 6 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 29 अप्रैल को शाम में 7 बजकर 51 मिनट पर होगा। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा करने का महत्व है। ऐसे में 28 अप्रैल को ही प्रदोष व्रत रखना शास्त्र सम्मत है क्योंकि, 28 अप्रैल को प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि व्याप्त है। इस दिन मंगलवार है इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा। वैसे तो दोनों ही दिन प्रदोष काल व्याप्त हो रहा है।
वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि समाप्त : 29 अप्रैल को शाम में 7 बजकर 51 मिनट पर
सूर्यास्त के समय से लेकर डेढ़ घंटे पहले तक के समय के बीच में आप पूजा कर सकते हैं।
भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि