Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का व्रत फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। पुराणों के अनुसार, यह व्रत सभी मुश्किलों को दूर करने और मोक्ष पाने में मदद करता है। माना जाता है कि यह एकादशी व्रत करने से भक्तों को जीवन के कठिन हालात में विजय प्राप्त होती है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है, लेकिन दशमी से लेकर द्वादशी तक इसके बहुत सख्त नियम होते हैं। हर हिंदू माह में एकादशी व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में दो बार किया जाता है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग है, लेकिन इसमें शुद्धता और स्वच्छता का बहुत ध्यान रखना होता है। आइए जानें शास्त्रों में एकादशी व्रत के लिए क्या नियम बताए गए हैं और कब किया जाएगा विजया एकादशी का व्रत
दशमी से द्वादशी तक एकादशी व्रत के नियम
नारद पुराण के अनुसार, एकादशी व्रत भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्तिपूर्वक इस व्रत को करते हैं, उनको पुण्यफल मिलता है और मोक्ष प्राप्त होता है। एकादशी का व्रत दशमी से शुरू होकर द्वादशी तक रहता है। इस व्रत में भक्त दशमी से ही सात्विक भोजन करते हैं और तामसिक चीजों से दूर रहते हैं।
पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12:22 बजे शुरू होगी और 13 फरवरी 2026 को दोपहर 02:25 बजे खत्म होगी। उदया तिथि के अनुसार, विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी को है।
विजया एकादशी व्रत का पारण का समय 14 फरवरी 2026, शनिवार को सुबह 07:00 बजे से सुबह 09:14 बजे तक है। पारण के दिन द्वादशी शाम 04:01 बजे खत्म होगी।
भगवान ब्रह्मा ने पद्म पुराण में नारद मुनि को विजया एकादशी का व्रत के महत्व के बारे में बताया है। पद्म पुराण के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत करने और इसकी कथा सुनने से मिलने वाला पुण्य वाजपेय यज्ञ करने के बराबर होता है। इस व्रत को करने वाले भक्त भगवान विष्णु के परम धाम, यानी वैकुंठ में स्थान पाते हैं और मोक्ष पाते हैं।