छीनने जा रही BCCI की आजादी! सरकार ने पेश किया राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, जानिए क्या होगा असर?

फिलहाल BCCI एक स्वायत्त निजी संगठन है जो भारत सरकार के भारतीय राष्ट्रीय खेल महासंघ के दायरे में नहीं आता है और युवा मामले और खेल मंत्रालय से कोई अनुदान प्राप्त नहीं करता है

अपडेटेड Jul 22, 2025 पर 5:14 PM
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बीसीसीआई दुनिया की सबसे अमीर स्वायत्त खेल संस्थाओं में से एक है

BCCI News: भारतीय खेल प्रशासन में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। सरकार ने संसद में राष्ट्रीय खेल गवर्नेंस विधेयक पेश कर दिया है। सबसे खास बात ये है कि इसके दायरे में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भी होगा। यानी BCCI जो फिलहाल एक स्वतंत्र बॉडी थी अब वो इस निकाय के अधीन हो जाएगी। खेल मंत्रालय से जुड़े एक सूत्र ने इसकी पुष्टि की है। सूत्र ने बताया कि, 'सभी राष्ट्रीय महासंघों की तरह बीसीसीआई को भी इस विधेयक के अधिनियम बनने के बाद देश के कानून का पालन करना होगा'। बता दें कि नया राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025 राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSF) और अन्य खेल निकायों के कामकाज में सुधार लाने के लिए लाया जा रहा है

बता दें कि BCCI साल 1926 में इंपीरियल क्रिकेट सम्मेलन में शामिल हो गया जो बाद में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद बन गया। यह एक स्वायत्त निजी संगठन है जो भारत सरकार के भारतीय राष्ट्रीय खेल महासंघ के दायरे में नहीं आता है और युवा मामले और खेल मंत्रालय से कोई अनुदान प्राप्त नहीं करता है।

खेल विधेयक का मसौदा पेश


खेल मंत्रालय ने संसद में राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025 का मसौदा पेश किया। इस कानून का उद्देश्य भारत में पूरे खेल इकोसिस्टम के कामकाज में सुधार लाना है। विधेयक का लक्ष्य देश के खेल प्रशासन ढांचे में ट्रांसपेरेंसी, एथलीट-केंद्रित सुधार लाना है।

बीसीसीआई पर क्या पड़ेगा प्रभाव

इस विधेयक के तहत BCCI के शामिल होने पर कई बड़े बदलाव होंगे। साल 2019 तक बीसीसीआई को राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) नहीं माना जाता था। हालांकि यह 2020 में RTI अधिनियम के दायरे में आया था। खेल विधेयक के लागू होने के साथ, बीसीसीआई स्वचालित रूप से एक NSF बन जाएगा, और खेल मंत्रालय के सभी नियम और विनियम इस पर लागू होंगे।

फिलहाल चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु BCCI के पदाधिकारियों के लिए आयु सीमा है। बीसीसीआई के वर्तमान अध्यक्ष, रोजर बिन्नी 19 जुलाई को 70 वर्ष के हो गए। बीसीसीआई के संविधान के अनुसार, 70 वर्ष की आयु पूरी करने वाला कोई भी पदाधिकारी अयोग्य हो जाता है। हालांकि, नए खेल विधेयक मसौदे में राष्ट्रीय खेल महासंघों में प्रशासकों के लिए ऊपरी आयु सीमा को 70 से बढ़ाकर 75 करने का प्रस्ताव है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो यह बिन्नी को अपना कार्यकाल जारी रखने की अनुमति दे सकता है।

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