गौतम गंभीर को जुलाई 2024 में राहुल द्रविड़ का कार्यकाल खत्म होने के बाद भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का हेड कोच बनाया गया था। कोच बनने के बाद उन्होंने टीम के साथ दो आईसीसी ट्रॉफी जीतने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि इस दौरान टीम को घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ दो निराशाजनक सीरीज में हार का सामना भी करना पड़ा। वहीं गौतम के कोच बनाने का फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था। क्योंकि, गौतम गंभीर को हेड कोच के तौर पर काम करने का ज्यादा अनुभव नहीं था।
पद मिलने पर गौतम खुद थे हैरान
गौतम गंभीर ने ANI के एक पॉडकास्ट में बताया कि जब जय शाह ने उन्हें टीम इंडिया का हेड कोच बनने का ऑफर दिया, तब वह इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे। हालांकि उस समय बीसीसीआई के सचिव रहे जय शाह ने उनसे कहा कि वह इस ऑफर को मना नहीं कर सकते।
गौतम गंभीर ने ANI को बताया, “मुझे याद है कि हम मुंबई में एक IPL मैच खेल रहे थे। KKR और मुंबई इंडियंस का मैच था और हम सेंट रेजिस होटल में ठहरे हुए थे। तभी जय भाई (जय शाह) का मुझे सुबह-सुबह फोन आया। उन्होंने कहा, ‘मुझे तुम्हें एक ऑफर देना है और तुम मुझे मना नहीं कर सकते।’ मैंने पूछा, ‘क्या?’ तब उन्होंने कहा, ‘तुम्हें टीम इंडिया का हेड कोच बनना होगा।’ सच कहूं तो उस समय मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार भी नहीं था।”
हेड कोच बनाना खास होता है
गौतम ने आगे कहा, “ये मेरे लिए बहुत बड़ा सरप्राइज था। मेरे हिसाब से भारतीय टीम का हेड कोच बनना अपने आप में एक बड़ा सम्मान है। यह एक खास मौका होता है, क्योंकि बहुत कम लोगों को दोबारा ड्रेसिंग रूम में जाने, इंडिया की जर्सी पहनने और देश के लिए कुछ खास करने का अवसर मिलता है।”
उन्होंने कहा, “मुझे बताइए कि कितने पूर्व क्रिकेटरों को यह मौका मिलता है? बहुत कम लोगों को। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि आप इस ऑफर को मना नहीं कर सकते। इसके बाद मैंने अपने परिवार से बात की और नताशा (मेरी पत्नी) से भी सलाह ली। लेकिन इसके लिए मैं जय शाह का शुक्रिया अदा करता हूं। मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी उनका धन्यवाद किया था।”
कोचिंग का एक्सपीरिएंस ना होने पर क्या कहा
गौतम गंभीर ने कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता था कि उनके पास कोचिंग का ज्यादा अनुभव नहीं था, फिर भी उन्हें भारतीय टीम का हेड कोच बनने का मौका दिया गया। उन्होंने कहा, “मुझे अच्छी तरह पता है कि जब मुझे यह जिम्मेदारी दी गई, तब मेरे पास हेड कोच बनने का कोई अनुभव नहीं था। मैं कभी किसी टीम या फ्रेंचाइजी का हेड कोच नहीं रहा था, मैं हमेशा मेंटर की भूमिका में ही रहा। इसके बावजूद उन्होंने इतनी बड़ी, दबाव भरी और हाई-प्रोफाइल जिम्मेदारी के लिए मुझ पर भरोसा किया। इसलिए उम्मीद है कि अब तक मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतर रहा हूं।”
गंभीर ने यह भी बताया कि जब न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज़ में भारत को खराब हार मिली थी, तब जय शाह ने उन्हें फोन कर हिम्मत बनाए रखने के लिए कहा था।