India vs England 4th Test : मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड ग्राउंड में भारत और इंग्लैंड के बीच एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी का चौथा टेस्ट मैच खेला जा रहा है। वहीं मैच के पहले दिन टीम इंडिया के धाकड़ बल्लेबाज ऋषभ पंत के पैर में चोट लग गई। ये चोट इतनी भयानक थी कि पंत ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे और उन्हें मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा। वहीं मैच के दूसरे दिन पंत ने कमाल की बहादुरी दिखाई और बैटिंग करने के लिए वापस आए। उन्होंने जख्मी पैर की परवाह ना करते हुए शानदार अर्धशतक लगाया। वहीं इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर डेविड लॉयड ने पंत को लेकर एक हैरान करने वाला बयान दिया है।
इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर डेविड लॉयड ने ऋषभ पंत पर मैच के दौरान जानबूझकर अपनी पैर की चोट का फायदा उठाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पंत की चोट शायद उतनी गंभीर नहीं थी, जितनी वो दिखा रहे थे। लॉयड ने यह भी कहा कि पंत ड्रेसिंग रूम से बाहर आने में ज्यादा समय ले रहे थे, इसलिए अंपायरों को उन्हें टाइम-आउट करार देना चाहिए था।
पंत को लगी थी चोट
टेस्ट मैच के पहले दिन ऋषभ पंत को क्रिस वोक्स की यॉर्कर बॉल लगी, जिससे उनके पैर की मेटाटार्सल हड्डी टूट गई। इस चोट के चलते उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा और साथी खिलाड़ियों की मदद से मैदान से बाहर ले जाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉक्टर्स ने पंत को करीब डेढ़ महीने आराम की सलाह दी है। इसके बावजूद जब भारत के छह विकेट गिर गए, तो पंत ने फिर से बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया और ड्रेसिंग रूम से बाहर आते वक्त दर्शकों की तालियों के बीच धीरे-धीरे चलकर मैदान में उतरे।
इंग्लैंड ने पूर्व क्रिकेटर ने कही ये बात
लॉयड ने टॉकस्पोर्ट क्रिकेट पर बातचीत में कहा, "ऋषभ पंत को देखकर मुझे नहीं लगा कि उन्हें मेटाटार्सल में गंभीर चोट लगी है, जो शायद पैर में कहीं होती है।" उन्होंने आगे कहा, "मैंने एंडी रॉबर्ट्स के खिलाफ खेलते हुए हाथ और गाल की हड्डी तुड़वा ली थी, जिसके बाद बल्लेबाज़ी नहीं कर पाया था। लेकिन जब मेरी उंगली टूटी थी, तब भी मैंने बल्लेबाज़ी की थी। पंत दर्द में जरूर दिखे, और उनका दोबारा मैदान पर लौटना एक साहसी कदम था।" लॉयड ने आगे जोड़ा, "मैं आज लीजेंड्स लाउंज में था और वहां मौजूद ज़्यादातर लोगों की यही राय थी कि उन्होंने अपनी चोट का थोड़ा ज़्यादा ड्रामा किया। कुछ का मानना था कि चोट इतनी गंभीर नहीं थी और उन्होंने इसका फायदा उठाया। सीढ़ियों से उतरने का उनका अंदाज भी कुछ लोगों को दिखावटी लगा, यहां तक कि कुछ ने यह तक कह दिया कि उन्हें टाइम-आउट दे देना चाहिए था।"
क्या होता है टाइम आउट
बता दें कि अगर कोई बल्लेबाज़ दो मिनट के भीतर क्रीज पर न पहुंचे, तो उसे ‘टाइम-आउट’ आउट दिया जा सकता है। ऋषभ पंत की चोट ने अब क्रिकेट में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। डेविड लॉयड का मानना है कि ऐसे हालात में सब्स्टीट्यूट की इजाज़त मिलनी चाहिए। अभी तक आईसीसी के नियमों के मुताबिक किसी खिलाड़ी को बल्लेबाज़ी या गेंदबाज़ी के लिए सब्स्टीट्यूट नहीं मिल सकता, जब तक कि मामला सिर में चोट (कन्कशन) से जुड़ा न हो। साथ ही, रनर की भी अनुमति नहीं दी जाती।
डेविड लॉयड ने अपनी राय रखते हुए कहा, "मैं शायद रनर के पक्ष में नहीं हूं, लेकिन अगर किसी खिलाड़ी को बाहरी चोट लगी है, तो मैं सब्स्टीट्यूट का समर्थन करता हूँ।" उन्होंने आगे कहा, "यह मामला थोड़ा जटिल हो सकता है, लेकिन अगर किसी को गंभीर चोट लगी हो, जैसे कोई फ्रैक्चर हो और वो मेडिकल रूप से छह हफ्ते तक फिट न हो पाए, तो ऐसी स्थिति में एक उपयुक्त विकल्प दिया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि किसी बल्लेबाज़ की जगह आप एक स्पिनर को मैदान पर भेज दें। इस पर सोच-विचार जरूरी है।"
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