चेन्नई सुपर किंग्स के फैंस आईपीएल 2026 सीजन को लेकर जितने उत्साहित थे, अब उतने ही निराश होते दिख रहे हैं। संजू सैमसन और कुछ नए खिलाड़ियों की एंट्री ने इस सीजन से उम्मीदें बढ़ाई हैं लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही टीम को इंजरी ने झटके दिए हैं। IPL 2026 में टीम ने युवा खिलाड़ियों पर बड़ा दांव लगाया और उत्तर प्रदेश के कार्तिक शर्मा व राजस्थान के प्रशांत वीर पर कुल मिलाकर 28.4 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। लेकिन टीम का रिकॉर्ड बताता है कि चेन्नई के लिए महंगे खिलाड़ी हमेशा फायदे का सौदा नहीं रहे हैं।
एंड्रयू फ्लिंटॉफ को 1.55 मिलियन डॉलर में खरीदने के बाद से चेन्नई सुपर किंग्स का अपने सबसे महंगे खिलाड़ियों को संभालने का रिकॉर्ड कुछ खास अच्छा नहीं रहा है। अगर कोई इस बात को समझना चाहता है, तो वह बस यह देख सकता है कि टीम के बड़े दाम में खरीदे गए खिलाड़ियों ने उसी सीजन में कैसा प्रदर्शन किया, जिससे साफ पता चलता है कि हर बार महंगी खरीद टीम के लिए सफल साबित नहीं हुई।
2012 से 2025 के बीच चेन्नई सुपर किंग्स के महंगे खिलाड़ियों का प्रदर्शन अक्सर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2012 की नीलामी में रविंद्र जडेजा करीब 2 मिलियन डॉलर में खरीदे गए थे और उनसे बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उस सीजन में उनकी बल्लेबाज़ी खास नहीं रही, उनका औसत सिर्फ 15 के आसपास रहा। हालांकि गेंदबाज़ी में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 12 विकेट लिए और एक बार पांच विकेट भी हासिल किए, लेकिन उनकी इकॉनमी रेट 7.8 तक पहुंच गई, जो पहले के मुकाबले ज्यादा थी। इससे साफ होता है कि भले ही उन्होंने विकेट लिए, लेकिन महंगे खिलाड़ी बनने का दबाव उनके प्रदर्शन के कुछ पहलुओं पर असर डालता नजर आया।
चेन्नई सुपर किंग्स के लिए महंगे खिलाड़ियों में सफल रहने वालों में क्रिस मॉरिस का नाम खास तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने 2013 में शानदार प्रदर्शन किया था। चैंपियंस लीग T20 में अच्छा खेल दिखाने के बाद उन्हें बड़ी रकम में खरीदा गया और उन्होंने टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उस सीजन में उन्होंने 15 विकेट लिए और उनकी इकॉनमी रेट 8.02 रही, जो उनके IPL करियर का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। बाद में उन्होंने अपने करियर में सिर्फ एक बार फिर 15 विकेट लिए, जो 2021 में था, लेकिन उस समय उनकी इकॉनमी रेट बढ़कर 9.17 हो गई थी, जिससे पता चलता है कि हर सीजन में उसी स्तर का प्रदर्शन बनाए रखना आसान नहीं होता।
चेन्नई सुपर किंग्स के लिए महंगे खिलाड़ियों में सफल रहने वालों में क्रिस मॉरिस का नाम खास तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने 2013 में शानदार प्रदर्शन किया था। चैंपियंस लीग T20 में अच्छा खेल दिखाने के बाद उन्हें बड़ी रकम में खरीदा गया और उन्होंने टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उस सीजन में उन्होंने 15 विकेट लिए और उनकी इकॉनमी रेट 8.02 रही, जो उनके IPL करियर का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। बाद में उन्होंने अपने करियर में सिर्फ एक बार फिर 15 विकेट लिए, जो 2021 में था, लेकिन उस समय उनकी इकॉनमी रेट बढ़कर 9.17 हो गई थी, जिससे पता चलता है कि हर सीजन में उसी स्तर का प्रदर्शन बनाए रखना आसान नहीं होता।
फाफ डु प्लेसिस और इरफान पठान
फाफ डु प्लेसिस ने 2012 में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन जब 2014 में उन्हें 4.75 करोड़ रुपये में टीम की सबसे महंगी खरीद के रूप में लिया गया, तो उनका प्रदर्शन थोड़ा गिर गया और उनका औसत व स्ट्राइक रेट पहले के मुकाबले कम हो गया। कुल मिलाकर फाफ का प्रदर्शन न तो बहुत खराब रहा और न ही बहुत शानदार। इसके बाद 2015 में यह पैटर्न और साफ दिखा, जब माइकल हसी और इरफान पठान को 1.5 करोड़ रुपये में खरीदा गया। इरफान पठान को एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला, जबकि हसी सिर्फ चार मैच ही खेल पाए और उनका प्रदर्शन भी साधारण रहा। उस समय ड्वेन स्मिथ और ब्रेंडन मैकुलम की तेज बल्लेबाजी के चलते टीम में उनकी जगह नहीं बन पाई, इसलिए हसी को सिर्फ प्लेऑफ में मौका मिला, जहां वह ज्यादा प्रभाव नहीं डाल सके।